तीन कृषि कानूनों के विरुद्ध किसान संघर्ष का जिक्र करते हुए चीमा ने कांग्रेस पार्टी को सवाल किया कि क्या उस समय कांग्रेस पार्टी की सरकार के मुख्यमंत्री ने कभी किसानों के हक में केंद्र को कोई पत्र लिखा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इन काले कानूनों के बारे में नीति बन रही थी तो उस समय पंजाब के वित्त मंत्री ने राज्य के मुख्यमंत्री के द्वारा नीति आयोग की बैठक में उपस्थित होकर भाजपा द्वारा बनाए गए तीन काले कानूनों के लए हामी भरी थी। दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी और इसकी दिल्ली सरकार संघर्ष के दौरान किसानों के साथ कंधे से कंधा जोड़ कर खड़ी रही।
चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री पंजाब द्वारा इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की जानकारी मिलते ही शुभकरण सिंह के परिवार की सहायता के लिए एक करोड़ रुपये की सहायता और बहनों के भविष्य में भी हर संभव सहायता का एलान किया था। इस घटना की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कानून अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वित्त मंत्री ने दोहराया कि कांग्रेस पार्टी द्वारा पंजाब के राज्यपाल के भाषण में सिर्फ इसलिए रुकावट डाली गई, क्योंकि इस दौरान उन्होंने पंजाब की नई खेल नीति, खिलाड़ियों को नौकरियां, खेलों को उत्साहित करने के लिए किए गए प्रयास, शिक्षा क्रांति के अंतर्गत स्कूल ऑफ एमिनेंस का निर्माण, आम आदमी क्लीनिकों के द्वारा एक करोड़ से अधिक लोगों का इलाज, घरों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने समेत अन्य योजनाओं के बारे जानकारी देनी थी।