पंजाब ऐग्रो की 28 हजार गेहूं के बैग एफसीआई ने रिजेक्ट कर दिए। बताया जा रहा है कि गेहूं पर बढ़िया स्प्रे नहीं होने के कारण कीड़ा लगने से आटा टाइप बन चुकी है। इस गेहूं की जांच एफसीआई की एक टीम ने की थी, उसी के बाद रिजेक्ट की गई। उधर, इस संबंधी जब पंजाब ऐग्रो के डीएम सुखमंदरजीत सिंह से बातचीत की तो उन्होंने अनभिज्ञता जताई।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक पंजाब ऐग्रो के गोदाम में पड़ी गेहूं खराब हो चुकी है। एफसीआई ने 28 हजार गेहूं के बैग लेकर स्पैशल लगानी थी। इससे पहले एफसीआई की टीम ने अधिकारी मीणा की अगुवाई में उक्त गोदाम में पड़ी गेहूं की जांच करवाई। जांच में पता चला कि गेहूं में कीड़ा लगने से लगभग आटा बन चुकी है। इस पर बढ़िया स्प्रे नहीं हुआ। गेहूं एक किस्म से खराब हो चुकी है।
एफसीआई की टीम ने उक्त गेहूं लेने से साफ इनकार कर दिया। जानकारों का कहना है कि गोदाम में पड़ी गेहूं की देख-रेख सही तरीके से नहीं की गई। ये गेहूं साल 2013-14 की थी। 28 हजार गेहूं के बैग की कीमत लगभग 45 लाख रुपये आंकी जा रही है।
ज्ञात हो कि पंजाब ऐग्रो की गोदाम से दस हजार बैग गायब है। इस संबंधी खुद पंजाब ऐग्रो के डीएम सुखमंदरजीत सिंह ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी है। यही नहीं एक इंस्पेक्टर को भी निलंबिल किए जाने की पुष्टि की थी। जानकारों का कहना है कि कहीं गायब गेहूं को पूरा करने के लिए खराब गेहूं वाले बैग गोदाम में रखकर एफसीआई को देने का प्रयास किया जा रहा हो। ताकि इस मामले में फंसे सभी अधिकारी व मुलाजिम बच सके।
एफसीआई की टीम ने गेहूं चेक की थी। उसमें कीड़ा लगा था। पंजाब ऐग्रो को कहा गया है कि गेहूं से कीड़ा खत्म किया जाए तभी गेहूं उठाई जाएगी। क्योंकि इस गेहूं को इंसानों ने खाना है। इसी कारण पंजाब ऐग्रो से गेहूं नहीं उठाई गई है। खराब गेहूं एफसीआई नहीं उठाता है।
(मंजीत कुमार गोयल, डीएम एफसीआई)