चंडीगढ़। द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के टैक्स रिसर्च डिपार्टमेंट ने सेक्टर-31 स्थित सीआईआई में टैक्स इवेशन एंड रिफॉर्म पर रविवार को सेमिनार का आयोजन किया। इसमें टैक्स चोरी और उसके कारणों से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान टैक्स कमेटी ऑफ नॉर्दर्न इंडिया रीजनल काउंसिल ऑफ आईसीएआई (एनआईआरसी) के चेयरमैन अनिल शर्मा ने कहा कि दोषपूर्ण कानून अनावश्यक मुकदमेबाजी को बढ़ाते हैं। कभी-कभी प्रावधान स्पष्ट नहीं होते हैं, जिसकी वजह से कई लोग जाने या अनजाने में टैक्स चोरी में लिप्त होने के लिए मजबूर होते हैं।
आईसीएआई के डायरेक्ट टैक्स कमेटी के चेयरमेन राकेश भल्ला ने आयकर अधिनियम 1961 के तहत लेखाकार की परिभाषा में बदलाव पर जोर दिया। उन्होंने आयकर अधिनियम 1961 को प्रत्यक्ष कर कोड से बदलने की भी बात की, जिसे लंबे समय से स्थगित रखा गया है। नेशनल एकेडमी ऑफ कस्टम, इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड नारकोटिक्स चंडीगढ़ के असिस्टेंट डायरेक्टर बलजीत सिंह खारा (आईआरएस) ने टैक्स चोरी को रोकने के लिए सरकार के दृष्टिकोण और चुनौतियों पर चर्चा की। सीएमए के चंडीगढ़-पंचकूला-मोहाली चैप्टर की चेयरपर्सन मानसी अरोड़ा ने सभी का स्वागत किया और कराधान के क्षेत्र में उनके प्रयासों की सराहना की। वकील, सीएमए, सीए और उद्योग के कार्यकारी सहित कराधान क्षेत्रों के 100 से अधिक पेशेवरों ने इस सेमिनार में भाग लिया। सीएमए संजय सिंह ने सभी का धन्यवाद किया। इस मौके पर सीनियर वाइस चेयरमैन अशोक जैन, वाइस चेयरमैन अमन कालरा, सीएमए भावना शर्मा, सीएमए मुकेश पांडेय, संजय सिंह, गीता ढींगरा, लवेंदर, दीपक मनचंदा आदि मौजूद रहे।