कई बार चेहरे में गड्ढे पड़ जाते हैं या फिर चेहरे का मांस नीचे लटकने लगता है। इसका सिर्फ एक ही इलाज है फैट ग्राफ्टिंग। यानी शरीर के एक हिस्से से फैट निकाल कर फेस में लगा देना। हालांकि इसका असर काफी कम समय तक रहता है। आठ महीने से एक साल के अंदर इसका असर खत्म हो जाता है।
अब पीजीआई ने इसके असर को बढ़ाने के लिए एक नई तरीके पर काम करना शुरू कर दिया है। पीजीआई के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सुनील गाबा के मुताबिक नए प्रोजेक्ट के तहत अब फैट के साथ स्ट्रामल वस्कुलर फ्रेक्शन (एसवीएफ) का इस्तेमाल किया जाएगा।
इससे शरीर में फैट दोगुने समय तक टिकता है। कुछ दिन पहले ही प्रोजेक्ट को शुरू किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रयोग सफल होगा।