फास्टैग, रेडियो फ्रिक्वेंसी आईडिफिकेशन टेक्नोलॉजी पर आधारित एक टैग है। यह गाड़ी की विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है। जैसे ही गाड़ी टोल प्लाजा पर पहुंचती है, वहां लगी डिवाइस गाड़ी की विंडस्क्रीन पर लगे टैग को रीड कर लेती है, और तुरंत टोल कट जाता है। अभी तक की व्यवस्था में कार्ड रीड होते ही बैरियर खुद-ब-खुद उठ जाता था। यूजर के फास्टैग अकाउंट से होने वाले सभी ट्रांजेक्शन की जानकारी उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस से मिलती है।
मोबाइल एप पर ऑनलाइन भी कर सकते हैं अप्लाई
फास्टैग कार्ड लगवाने के लिए टोल प्लाजा के काउंटर के अलावा एनएचएआई द्वारा एसबीआई, आईसीआईसीआई, आईडीएफसी, एचडीएफसी और आईएचएमसीएल को अधिकृत किया है। इसके अलावा ऑनलाइन एप में पेटीएम, माई फास्टैग एप और एमजॉन पर भी आवेदन कर सकते हैं। फास्टैग के लिए गाड़ी की आरसी, गाड़ी मालिक का पासपोर्ट साइज फोटो, आईडी प्रूफ और एड्रेस प्रूफ की कॉपी देनी होगी।
टोल छूट वाले वाहनों को जीरो बैलेंस फास्टैग अनिवार्य
नेशनल हाईवे पर अब तक टोल से छूट वाले वाहनों पर भी पहली दिसंबर से जीरो बैलेंस फास्टैग लगाना होगा। केंद्र सरकार ने ऐसे सभी लोगों और विभागों को जीरो बैलेंस फास्टैग लेने के लिए कह दिया है। फास्टैग न होने पर ऐसे वाहन चालकों को ‘टोल फ्री व्हीकल’ होने का प्रमाण-पत्र देना होगा। ऐसे वाहनों को टोल पर बनी सिंगल कैश लेन से गुजरना पड़ेगा।
डेली अप डाउन करने वालों का चलेगा मासिक पास
फास्टैग कार्ड में कम से कम 100 रुपये से लेकर अधिकतम कितने भी पैसे डलवा सकते हैं, जो उसमें लाइफटाइम तक रहेंगे। कार्ड खराब हो जाने की सूरत में 100 रुपये में नया कार्ड खरीदा जा सकता है। टोल से रोज अप-डाउन करने वाले स्थानीय लोगों के निजी वाहनों का मासिक पास पहले की तरह 235 रुपये में ही बनेगा।
घरौंडा टोल प्लाजा से रोजाना करीब 55 हजार वाहन निकलते हैं। अभी महज 35 प्रतिशत वाहन ही फास्टैग वाले हैं। रोजाना टोल प्लाजा पर औसतन 260 कार्ड बन रहे हैं। 400 रुपये में कार्ड की लाइफ टाइम वैलिडिटी मिलेगी। इसमें 100 रुपये का कार्ड है, 200 कार्ड की सिक्योरिटी के जमा होंगे। इसके अलावा 100 रुपये का बैलेंस मिलेगा। -आदित्य राणा, इंजीनियर, एनएचएआई।