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कृषि कानूनः पंजाब में केंद्र सरकार के पुतले फूंके, विधेयकों की जलाईं प्रतियां, जगह-जगह रोड जाम

Sun, 20 Sep 2020 06:30 PM IST
ajay kumar अमर उजाला नेटवर्क, पंजाब

सार

  • अमृतसर में टावर पर चढ़े किसान को कड़ी मशक्क त के बाद नीचे उतारा
  •  भाकियू सिद्धूपुरा ने किया एलान- भाजपा के नुमाइंदों को गांवों में घुसने नहीं देंगे
  • पूरे देश के किसानों को एक मंच पर लाने की तैयारी में जुटीं किसान जत्थेबंदियां
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पंजाब में युवा कांग्रेस की ट्रैक्टर रैली। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कृषि विधेयकों के राज्यसभा में पारित होने के साथ ही रविवार को पंजाब में किसानों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया। सूबे में जगह-जगह केंद्र सरकार के पुतले फूंके गए और कृषि विधेयकों की प्रतियां जलाई गईं।आंदोलनकारी किसानों ने कई जगह रोड जाम कर विरोध में नारेबाजी की तो। उधर, ट्रैक्टरों से दिल्ली कूच कर रहे यूथ कांग्रेसियों को पंजाब हरियाणा बार्डर पर रोका गया।  

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 आंदोलनकारी किसानों ने कई जगह रोड जाम कर विरोध में नारेबाजी की। इस बीच अमृतसर में नारे लगाता एक किसान टावर पर चढ़ गया, जिसे चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद नीचे उतारा गया। सूबे की किसान जत्थेबंदियों ने एक सुर में एलान किया है कि वे इस काले कानून को वापस करवाकर ही दम लेंगी। इसके लिए उन्होंने देशभर किसानों को एक मंच पर लाने की तैयारी शुरू कर दी है। भाकियू सिद्धूपुरा ने किया एलान किया है कि भाजपा के नुमाइंदों को गांवों में घुसने नहीं दिया जाएगा।

 विभिन्न मु्द्दों पर अलग-अलग राय रखने वाली पंजाब की लगभग 30 किसान यूनियनें कृषि विधेयकों के विरोध में एक साथ आ गई हैं। वहीं, पंजाबी गायक भी किसानों के आंदोलन के समर्थन में उतर आए हैं। रविवार को अबोहर, अमृतसर, बठिंडा, फिरोजपुर, फरीदकोट, बटाला, पठानकोट, मुक्तसर, मोगा, पटियाला, संगरूर, सुनाम में शहर से लेकर गांवों तक सड़कों, हाईवे, चौकों पर केंद्र सरकार के पुतले फूंककर किसानों ने गुस्से का इजहार किया।
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सुनाम में पटियाला-बठिंडा मुख्य मार्ग पर, पटियाला में चंडीगढ़-पटियाला रोड पर, अमृतसर में डीसी दफ्तर के बाहर किसानों ने जाम लगाकर केंद्र के खिलाफ नारेबाजी की। बठिंडा में तीन स्थानों पर पुतले फूंके गए। फतेहगढ़ साहिब से यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता ट्रैक्टरों से दिल्ली कूच पर निकले, जिन्हें जीरकपुर में रोक लिया गया। यहां उनकी पुलिस से तीखी झड़प भी हुई।

सात घंटे तक जाम रहा दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे

उधर, ट्रैक्टरों से दिल्ली कूच कर रहे पंजाब भर के युवा कांग्रेसियों को पंजाब-हरियाणा की सीमा पर लालड़ूू के गांव झरमिड़ी में पुलिस ने रोक दिया। इसके कारण वहां चंडीगढ़-दिल्ली नेशनल हाईवे पर करीब सात घंटे तक यातायात ठप रहा। इस दौरान एक एंबुलेंस भी काफी देर तक फंसी रही। पंजाब और हरियाणा बार्डर पर बैरिकेड लगाकर पुलिस ने युवा कांग्रेस की ट्रैक्टर रैली को रोक लिया। युवा कांग्रेसियों और किसानों ने पुलिस बैरियर को उखाड़ना शुरू कर दिया। उनको काबू में लाने के लिए पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया।

लेकिन फिर भी जब पुलिस को सफलता नहीं मिली तो उन्होंने वाटर कैनन चलाना शुरू किया। लेकिन आंदोलनकारी फिर भी काबू में नहीं आए तो पुलिस ने अपनी वैन में भरना शुरू कर दिया। इस दौरान  पुलिस ने यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रधान श्रीनिवास, राज्य प्रधान बरिंद्र सिंह ढ़िल्लों, राज्य महासचिव उदयवीर सिंह ढ़िल्लों सहित 20 के करीब नेताओं को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ धारा 144 के तहत केस दर्ज कर लिया और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया।

दिन भर नारों से गूंजतीं रहीं गांव बादल की गलियां
कृषि विधेयक रद्द कराने की मांग को लेकर बादल निवास के सामने चल रहे संघर्ष के तहत छठे दिन किसानों ने रविवार को बादल गांव में रोष मार्च निकालते हुए बस स्टैंड पर पहुंचकर केंद्र सरकार के खिलाफ अर्थी फूंक प्रदर्शन किया। इस दौरान किसान नेता कृषि अध्यादेश रद्द करने को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी नेतृत्व वाली सरकार के अलावा सहयोगी पार्टी शिअद के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। दिन भर बादल गांव के चौक और गलियां नारों से गूंजती रहीं। रोष मार्च बादल गांव की गलियों से होते हुआ बस स्टैंड पहुंचा, जहां केंद्र सरकार की अर्थी फूंकी गई।

भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के प्रदेश सचिव शिंगारा सिंह ने बताया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती संघर्ष जारी रखेंगे। रोष मार्च में बड़ी गिनती में किसान नेता शामिल हुए। प्रदर्शन से पहले सुबह लंगर वाली जगह पर पहले किसान नेता एकत्र होते दिखाई दिए। वहीं कई किसान वहीं टेंट के पास तैयार होते नजर आ रहे थे। कई किसान ट्रॉलियों के जरिए पहुंचे लंगर सेवा के पास लंगर लेते दिखाई दिए। किसानों ने बादल निवास के पास पक्का मोर्चा लगा रखा है।

किसान गुमराह न हों, अपने लाभ को समझें : सनी देओल

बठिंडा। गुरदासपुर से भाजपा के सांसद सन्नी देओल ने देर शाम कृषि विधेयक के समर्थन में ट्वीट किया। इसमें उन्होंने किसानों को कहा कि वे गुमराह मत हों, अपने लाभ को समझें।

देश की रीढ़ हैं किसान, जबरन न थोपें अध्यादेश
किसान देश की रीढ़ की हड्डी हैं। मैं किसान का बेटा हूं और देश के हर किसान के साथ खड़ा हूं। सरकार की गलत नीतियों के चलते किसान सड़कों पर आ रहे हैं। किसानों पर जबरन कोई अध्यादेश थोपे गए तो ऐसे ही धरने-प्रदर्शन होंगे। पिछले छह माह से कोरोना महामारी से हर वर्ग की तरह देश का किसान भी परेशान हैं। देश के मेहनतकश करोड़ों किसानों के प्रति नरम रुख अख्तियार करना ही  चाहिए।
- दिलीप सिंह राणा उर्फ द ग्रेट खली, रेसलर  

मुक्तसर के गांव संगराना के युवक का हुआ गाना वायरल
‘जट्टा छड्ड दे आस तूं हुण इहना सरकारां तों, तू अन्नदाता जट्टा की लैणा इहना कावां दीयां डारां तो’ यह गीत इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसे मुक्तसर के गांव संगराना के युवक सतिंदर सिंह ने लिखा और गाया है। सतिंदर ने बताया कि वह पेशे से सीमेंट विक्रेता हैं। इन दिनों किसानी का मुद्दा खूब गर्माया हुआ है। उन्होंने यही सोचकर किसानों को समर्पित यह गीत लिखा। उन्होंने किसानों को सरकारों की चाल में न आने की बात कहते हुए खुद ही अपने मुद्दों और मांगों के संबंध में कोई हल ढूंढने की बात पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि किसान देश के अन्नदाता हैं, मगर उनकी बेकद्री हो रही है।

कृषि विधेयक के खिलाफ टावर पर चढ़ा किसान

- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। कृषि बिलों के विरोध में एक किसान गांव मुद्दल में मोबाइल टावर पर चढ़ गया। लोगों को पता चला तो सूचना पुलिस थाना छेहरटा को दी। आखिर चार घंटे बाद बड़ी मुश्किल से पुलिस उसे नीचे उतारने में सफल रही। इसके बाद मजीठा निवासी बख्तावर सिंह को पुलिस थाने ले गई। बाद में उसे छोड़ दिया गया। बख्तावर किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी का सदस्य भी है।

खेती कानून से पंजाब में 7 लाख लोग होंगे बेरोजगार: विजयइंद्र सिंगला
संगरूर। शिक्षा मंत्री विजयइंद्र सिंगला ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पारित खेती कानून से पंजाब के 7 लाख लोगों का रोजगार चला जाएगा। इसकी वजह से अनाज मंडियां खत्म होने का बड़ा खतरा है। रविवार को अपने निवास स्थान पर सूबे से कई पहुंचीं आढ़ती एसोसिएशन पहुंची। उन्होंने एसोसिएशन से इस कानून का विरोध करने की बात कही।

उन्होंने कहा कि इस कानून से मोदी सरकार आढ़तियों और किसानों का गला घोटना चाहती है। आढ़ती सरकार और किसानों के बीच मजबूत कड़ी हैं। यदि केंद्र सरकार ने इस कानून को वापस न लिया तो मजबूरन आढ़तियों को भी सड़क पर उतरना पड़ेगा। उन्होंने सभी आढ़ती एसोसिएशन से अपील की कि संसद मार्ग से लेकर उत्तर भारत में चक्का जाम किया जाए, ताकि इन काले कानूनों के खिलाफ रोष दर्ज करवाया जा सके।

‘किसानों से किया धोखा, गांवों में भाजपा के नुमाइंदों को घुसने नहीं देंगे’

सुनाम ऊधम सिंह वाला (संगरूर)। भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुरा ने घोषणा की कि गांवों में भाजपा का तीखा विरोध किया जाएगा और इनके नुमांइदों को घुसने नहीं दिया जाएगा। कृषि विधेयक के खिलाफ रविवार को अनाज मंडी में यूनियन ने रोष रैली निकाली। इसे संबोधित करते भाकियू सिद्धूपुरा के नेता रण सिंह ने कहा कि भाजपा ने किसानों के साथ धोखा किया है।

पंजाब का हर वर्ग इस कानून से प्रभावित होगा। कई वर्ग तो बिलकुल बर्बाद हो जाएंगे। वे भाजपा का जोरदार विरोध जारी रखेंगे। इस पार्टी ने किसान विरोधी फैसले लिए हैं और अपने चंद बडे़ उद्योगपतियों को लाभ देने के लिए पूरा खेल रचा है। किसान इस कानून को किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेंगे। किसानों का आंदोलन जारी रहेगा।

पंजाब, हरियाणा को कानून के दायरे से बाहर रखा जाए: सांसद ढींढसा  
सुनाम ऊधम सिंह वाला (संगरूर)। राज्यसभा में सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने पंजाब व हरियाणा को नए खेती कानून के बाहर रखने की मांग उठाई है। सांसद ढींढसा ने कहा कि उनकी पार्टी, किसानों के साथ है और रविवार को उन्होंने किसानों के दर्द को सदन में रखा है। पंजाब के किसान ने उस वक्त देश को अनाज दिया, जब विदेशों से अनाज आयात होता था।

किसानों को अभी तक प्राइस इंडेक्स के अनुसार जिन्सों का एमएसपी तक नहीं दिया गया और किसान विरोधी कानून बना दिया है। ढींढसा ने कहा कि सदन में उन्होंने मांग उठाई है कि इस मामले को सिलेक्टिव कमेटी को सौंपा जाए और किसानों को इसमें शामिल करके उनकी राय से कानून बनाया जाए।

सुनाम में पटियाला-बठिंडा मुख्य मार्ग पर दो घंटे लगाया जाम

सुनाम ऊधम सिंह वाला (संगरूर)। रविवार को पास हुए कृषि संबंधी कानून के विरोध में किसानों का आक्रोश चरम पर है। रविवार को 30 किसान संगठनों ने एक मंच पर आकर केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोला। गांवों में चौराहों से लेकर नेशनल व स्टेट हाईवे जाम कर रोष प्रदर्शन किए। सुनाम में पटियाला-बठिंडा मुख्य मार्ग पर दो घंटे तक जाम लगाकर किसान यूनियनों, आढ़तियों व मजदूरों ने यातायात बाधित कर केंद्र सरकार के खिलाफ रोष जताया।

साथ ही पीएम मोदी के पुतले फूंके। इससे पहले किसानों व आढ़तियों ने शहर में रोष रैली निकाली और केंद्र के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भाकियू एकता सिद्धूपुरा के जिला महासचिव रण सिंह के नेतृत्व में आंदोलन में केंद्र सरकार की अर्थी निकाली। प्रतिनिधियों ने कहा कि केंद्र सरकार, किसानों से धोखा कर रही है। बडे़ पूंजीपतियों को लाभ देने के लिए केंद्र सरकार देशभर के किसानों के हितों को बेच रही है। पंजाब के किसान ने संकट के दौर में पूरे देश को अनाज दिया लेकिन अब केंद्र सरकार अपने चहेतों को पूरी खेती प्रणाली सौंपना चाहती है।

पंजाब का किसान अंतिम सांस तक ऐसा नहीं होने देगा। आढ़ती आगू मुनीष सोनी, रविंदर चीमां आदि ने कहा कि मोदी सरकार तो किसानों के साथ आढ़ती को भी बर्बाद करना चाहती है। किसान आढ़ती के रिश्ते को खत्म करने की कोशिश इस कानून के जरिए की जा रही है। दूसरी तरफ जिले के गांवों में भी केंद्र सरकार के पुतले फूंके गए। गांव जखेपल, हंबलवास, तोलावाल, उगराहां समेत लगभग सभी गांवों में किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ भड़ास निकाली।

चंडीगढ़-बठिंडा रोड जाम कर प्रदर्शन

पटियाला। भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के बैनर तले किसानों ने इकट्ठा होकर पसियाना पुल पर पुतला फूंककर प्रदर्शन किया। इसके बाद चंडीगढ़-बठिंडा हाईवे जाम कर दिया। किसान नेता जगमोहन सिंह ने कहा कि इन तीनों कानूनों से पंजाब का मंडी प्रबंध पूरी तरह से तहस-नहस हो जाएगा। राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर की सरकारी खरीद एजेंसियां मंडी से बाहर हो जाएंगी और किसानों को अपनी फसल की बिक्री के लिए कारपोरेट घरानों व बड़े प्राइवेट व्यापारियों के रहमो करम पर छोड़ दिया जाएगा।

पंजाबी गायक गिप्पी ग्रेवाल एवं गुरदास मान का किसानों के हक में ट्वीट
बठिंडा। पंजाबी गायक एवं अभिनेता गिप्पी ग्रेवाल और गुरदास मान अपने ट्विटर अकाउंट पर किसानों के समर्थन में आए। पंजाबी गायक गिप्पी ग्रेवाल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा किसान मजदूर एकता जिंदाबाद, इसके साथ ग्रेवाल ने  किसानों के हक में गाना गाते हुए कहा कि सरकारें हम नहीं मरेंगे हम तेरे जुल्म को मारेंगे। इसके वलावा पंजाबी गायक गुरदास मान ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिये अन्नदाता का समर्थन करते हुए लिखा कि किसान है तो हिंदुस्तान है।

बठिंडा में किसानों के धरने में पहुंचे पंजाबी गायक
नए खेती कानूनों के खिलाफ किसानों का धरना रविवार को भी जारी रहा। भारतीय किसान यूनियन सिधुपुर ने बस स्टैंड के समीप प्रधानमंत्री मोदी की अर्थी फूंककर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं पंजाबी गायक गुरविंदर बराड़ और हरप्रीत चीमा किसानों के धरने में पहुंचे और गीत गाकर किसानों के आंदोलन का समर्थन किया। भारतीय किसान यूनियन के नेता काका सिंह, सुखदेव सिंह ने कहा के केंद्र सरकार नए खेती कानूनों से किसानों को आर्थिक तौर पर मारना चाहती है। उन्होंने मांग उठाई के नए कानूनों को केंद्र सरकार खारिज करें।

किसान नेताओं ने कहा के केंद्र सरकार किसानों से सीधी बात कर सवालों का जवाब दे। भारतीय किसान यूनियन के नेता जगसीर सिंह ने बताया के जिले में 30 स्थानों पर किसान जत्थेबंदियों की ओर से केंद्र सरकार के पुतले फूंके गए है। थर्मल ठेका संघर्ष कर्मीयों ने किसानों के हक में रोष मार्च करते हुए केंद्र सरकार की अर्थी फूंकी। किसानों के धरने में पंजाबी गायक गुरविंदर बराड़ और हरप्रीत चीमा पहुंचे। दोनों गायकों ने अपने गीतों के जरिये केंद्र सरकार का विरोध जताते हुए किसानों के हक में आवाज बुलंद की।
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सड़कों पर उतरे किसान, केंद्र का पुतला फूंका, कानूनों की कापियां जलाईं

पटियाला। केंद्र के खिलाफ हल्ला बोलते हुए रविवार को सैकड़ों किसान भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के बैनर तले बसों, ट्रालियों व अन्य वाहनों में सवार होकर सड़कों पर उतरे। गुस्साए किसानों ने केंद्र सरकार का पुतला फूंका और खेती आर्डिनेंस की कापियां फूंकीं। उन्होंने कहा कि कानून वापस न लिया गया तो किसानों की कुर्बानियां लेने को केंद्र तैयार रहे।

खेती कानूनों के खिलाफ कई दिनों से पुडा ग्राउंड में पक्का मोर्चा लगाकर बैठे किसानों ने रविवार को तीन बजे अपने परिवार की महिलाओं, नौजवान लड़के-लड़कियों के साथ इकट्ठा होकर रोष मार्च निकाला। पुडा ग्राउंड से गुरुद्वारा दुखनिवारण साहिब के सामने चौक पर आकर भड़के किसानों ने अर्थी फूंक प्रदर्शन किया। इसके बाद किसानों ने खंडा चौक तक मार्च निकाला।

किसान नेताओं जसविंदर सिंह सोमा लौंगोवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, करनैल सिंह लंग ने कहा कि यह खेती कानून किसानों व मजदूरों की बर्बादी कर देंगे। उन्होंने सभी किसान जत्थेबंदियों से अपील की कि इन पास किए खेती कानूनों को रद्द कराने के लिए 25 सितंबर को जा रही हड़ताल में सहयोग दें। इन काले कानूनों को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दिया जाएगा। सरकार को यह वापस लेने पड़ेंगे।
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