पंजाब ने 1970 के दशक में भारत को चावल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का नेतृत्व किया लेकिन गेहूं की तरह धान की पैदावार में भी पंजाब अब नंबर वन राज्य नहीं है। उत्पादन के मामले में यह पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से पीछे है। अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के कुल उत्पादन में इसका हिस्सा 10 फीसदी से भी कम है। भारत 135 मिलियन टन का उत्पादन करता है जबकि पंजाब 11.82 मिलियन टन है, जो 10 फीसदी से की कम है।
वहीं, बागवानी के मामले में पंजाब कहीं नहीं खड़ा है। सब्जियों का उत्पादन 200 मिलियन टन से अधिक हो गया है। टॉप राज्यों में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात हैं। शीर्ष पांच दूध उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश हैं।
किसानों को खेती में विविधता लाने की आवश्यकता
पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रो. हरी सिंह का कहना है कि पंजाब में कृषि वर्तमान स्वरूप में टिकने वाली नहीं है और वहां के किसानों को तत्काल खेती में विविधता लाने की आवश्यकता है। इसका मतलब है कि वहां के किसानों को अधिक बाजरा, अधिक सब्जियां, अधिक दूध, अंडे और वैसी बहुत चीजें पैदा करने की जरूरत है, जो आइटम अभी एक हेल्दी फैमिली डाइट का हिस्सा हैं। समय की मांग के अनुसार बदलना चाहिए। अब देश के कई हिस्सों में गेहूं पैदा हो रहा है। मध्य प्रदेश की गेहूं की मांग बढ़ती जा रही है। धान व गेहूं उत्पादन में कई राज्य आगे निकल गए हैं।