पंजाब में इस बार धान का कुल रकबा 29 लाख हेक्टेयर था जिसमें से 6.29 लाख हेक्टेयर बासमती है। इस कारण 22.71 लाख हेक्टेयर धान की पराली के खेत में प्रबंधन की जरूरत पड़ेगी क्योंकि बासमती की पराली पशु चारे के रूप में इस्तेमाल की जाती है।
सारे उपाय बेअसर
खेतीबाड़ी विभाग ने पराली जलाने से रोकने को हर तरह के उपाय किए, लेकिन अब तक उनका असर नजर नहीं आया है। विभागीय सचिव काहन सिंह पन्नू ने बताया कि पराली प्रबंधन के लिए मशीनें दी जा रही हैं। प्रगतिशील किसान और विभागीय टीमें किसानों को जागरूक कर रही हैं।
मोबाइल वैन जा रही हैं, गांवों में कैंप लगाए जा रहे हैं। 18 अक्तूबर को सभी ग्रामीण स्कूलों के बच्चे अपने-अपने इलाकों में जागरूकता रैलियां निकालेंगे। सभी जिलों की कमान सीनियर आईएएस अफसरों को सौंपी गई है। राजस्व विभाग को पराली जलाने वालों पर कार्रवाई करने को कहा गया है।
2018 में हुए थे 1.37 करोड़ के चालान
पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने 2018 के धान सीजन में पराली जलाने के मामलों में 1.37 करोड़ के चालान किए थे। इनमें से 19 लाख रुपये रिकवर हो गए थे। बाकी कई केस कोर्ट में चल रहे हैं। इस बार भी बोर्ड ने कार्रवाई की तैयारी कर ली है। जैसे-जैसे रिपोर्ट आएंगी, पराली जलाने वाले किसानों पर कार्रवाई की जाएगी।
पंजाब सरकार ने किसानों से अपील की थी कि इस साल श्री गुरु नानक देव जी का ऐतिहासिक 550वां प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है। उन्होंने ही पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महात का संदेश दिया था। इसलिए इस महत्वपूर्ण अवसर पर उनके फलसफे पर चलते हुए पराली न जलाएं। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी सरकार का समर्थन करते हुए किसानों से पराली न जलाने की अपील की थी।
एसजीपीसी के सचिव दलजीत सिंह बेदी ने बताया कि कमेटी की एक हजार एकड़ खेतीबाड़ी योग्य जमीन है। वहां तो पराली जलाने की सख्त मनाही है ही, इसके अलावा पूरे पंजाब के किसानों से अपील की गई है कि वे पराली न जलाएं। इस बार तो देश-विदेश से लाखों की तादाद में गुरु नानक नामलेवा संगतों ने 550वें प्रकाश पर्व समागमों में हिस्सा लेने पंजाब आना है। पराली जलाने से अच्छा प्रभाव नहीं पड़ेगा।