भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मटका चौक पर 320 दिन से चल रहा किसानों का धरना समाप्त कराया। टिकैत ने सभी किसानों को बधाई दी और बाबा लाभ सिंह का मुंह मीठा कराकर गले लगाया। उन्होंने कहा कि किसानों की एकजुटता ने सरकार के अहंकार को तोड़ा है। उन्होंने आंदोलन के कारण आम जनता को हुई परेशानी के लिए माफी भी मांगी।
इस मौके पर बाबा लाभ सिंह ने कहा कि यहां उनके जीवन का पांचवां धरना है। पूरी जिंदगी आंदोलनों में लगाई है। किसानों के संघर्ष में भी साथ रहा। किसानों ने एक तानाशाह का घमंड चकनाचूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि टेंट नहीं हटेगा। यहीं पर लंगर की सेवा चलती रहेगी। बाबा लाभ सिंह ने कहा कि वह करनाल के तहसील संड के जलमाना गांव के रहनेवाले हैं। उनके पास 40 किल्ले जमीन है। एक किल्ले जमीन का पैसा लंगर सेवा में लगाते हैं। परिवार के लोग भी घर ले जाने के लिए आए लेकिन नहीं गया।
बाबा ने आंदोलन में शहीद हुए किसानों के नाम पर जामुन का पौधा लगाया है। बाबा उसकी देखभाल करते रहे हैं। बाबा लाभ सिंह ने कहा कि हमारे लिए सभी टिकैत हैं। पुलिस वाले भी हमारे हैं। पुलिस की ड्यूटी होती है वे उसका पालन करते हैं।
मोहाली निवासी किसान आंदोलन से जुड़े ट्रांसपोर्टर रजिंदर सिंह का कहना है कि वे दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक आंदोलन में साथ रहे। किसानी आंदोलन में साथ निभाने के लिए उन्होंने अपना ट्रक बेच दिया। अब आंदोलन खत्म हो चुका है इसलिए ट्रक खरीदेंगे।
गांव खुड्डा अलीशेर के पूर्व सरपंच और पेंडू संघर्ष कमेटी के संरक्षक बाबा गुरदियाल सिंह ने टिकैत को संगत की ओर से पगड़ी बांधी। गुुरदियाल सिंह ने कहा कि गांव की संगत की ओर से किसानी आंदोलन की जीत की खुशी में मटका चौक पर चार क्विंटल लड्डू बांटे। उधर, गांव खुड्डा अलीशेर के बच्चों युवराज, महेश, अनुज, सूरज, जसलीन सहित अन्य ने मटका चौक पर खूब नारे लगाए।
टिकैत ने राजन बैंस को जूते पहनाए। राजन बैंस कांसल गांव के रहने वाले हैं। आंदोलन के दौरान वह नंगे पैर रहे। उन्होंने प्रण किया था कि जीतने के बाद ही जूते पहनेंगे। यहां तक कि बहन की शादी में भी उन्होंने जूते नहीं पहने।
27 जनवरी 2021 को किसानों के समर्थन में मटका चौक पर धरना शुरू हुआ था। दिनभर किसान समर्थक मटका चौक पर बैठते और शाम को साढ़े आठ बजे लौट जाते। लोग जुड़ते गए और कारवां बढ़ता गया, लेकिन बाबा लाभ सिंह के मटका चौक पर आने के बाद यह चौक किसान आंदोलन का गढ़ बन गया। लोगों ने बताया कि 26 जनवरी को दिल्ली की घटना के बाद ऐसा लग रहा था कि आंदोलन समाप्त हो जाएगा। मटका चौक पर किसानी झंडा लिए किसान समर्थकों को कुछ लोगों ने धमकाया। कहा कि आज से मटका चौक पर किसानी झंडे के साथ मत दिखना। इस धमकी को किसान समर्थकों ने चुनौती के रूप में लिया। बड़ी संख्या में किसान मटका चौक पर किसानी झंडा लिए पहुंच गए। आसपास के गांव से लोगों का समर्थन मिलने से आंदोलन को और बल मिला। लंगर की जिम्मेदारी आसपास के गांव और चंडीगढ़ की संगत ने उठाई। साथ ही भाजपा के कई कार्यक्रमों का भी जोरदार तरीके से विरोध शुरू हो गया। पांच बार पुलिस मटका चौक से टेंट उठाकर ले गई, लेकिन समर्थकों के विरोध के चलते लौटाना पड़ा। एक बार तो टेंट उठने के बाद बाबा लाभ सिंह बारिश में भी मटका चौक पर डटे रहे।