सीएम की तरफ से आश्वासन दिया गया कि इसको लेकर विचार किया जाएगा। सीएम ने तर्क दिया कि कुछ मामले अदालत में विचाराधीन हैं तो कई गंभीर धाराओं में दर्ज हैं लेकिन किसान नेताओं ने कहा कि सभी केस एक साथ वापस लिए जाएं। इस मुद्दे पर किसानों और सरकार के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई।
दूसरे दौर की बैठक में नहीं हुआ कोई फैसला
पहले दौर की बैठक में सहमति नहीं बनने के बाद 8.30 बजे दोनों पक्षों में दूसरे दौर की बैठक हुई। इसमें किसानों ने मृत किसानों के परिजनों को नौकरी, मुआवजा देने और सिंधु बॉर्डर पर शहीद किसानों का स्मारक बनाने की मांग रखी। सरकार की ओर से स्मारक के लिए जमीन देने से इनकार कर दिया गया। इसी प्रकार, मृत परिवारों को नौकरी और मुआवजे को लेकर भी कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया। इन्हीं मामलों को लेकर पेच फंस गया। करीब 10 मिनट तक दूसरे दौर की वार्ता चली और सरकार के रुख को देखते हुए किसान नेता बैठक से बाहर निकल गए।
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ये किसान नेता रहे मौजूद
बैठक में किसानों की ओर से भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी, रतन मान, राकेश बैंस, रामपाल चहल, जरनैल सिंह, जोगिंद्र नैन, इंद्रजीत और अभिमन्यु कुहाड़ मौजूद रहे। भाकियू नेता रतन मान ने कहा कि बैठक में किसी भी मांग पर सहमति नहीं बनी है।
सरकार की तरफ से कोई संतोषजनक बात नहीं कही गई। बैठक पूरी तरह से बेनतीजा रही है। हालांकि सरकार का रवैया न तो ज्यादा नरम था और न ही सख्त। अब शनिवार को सिंघु बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के साथ बैठक होगी। उसमें पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद ही आगामी रणनीति तैयार की जाएगी। - गुरनाम सिंह चढूनी, प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू।