पंजाब के गायकों व गीतकारों को आंदोलन को नए तेवर और ताप देने वाली नई रंगत बख्शी है। किसान एंथम ने जहां पिछली बार किसानी आंदोलन में जोश भर दिया था, वहीं पंजाब के नामी गिनामी कलाकार इस बार दूर से किसान आंदोलन पर नजर रख रहे हैं।
1907 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ पंजाब में जनांदोलन का आह्वान करते हुए आंदोलनकारी बांके दयाल ने एक जनगीत लिखा था, पगड़ी संभाल जट्टा, पगड़ी संभाल ओए...इस गीत को उस दौर में इसे गाने वालों में भगत सिंह के पिता और चाचा भी शामिल थे।
पंजाबी अस्मिता और आत्मसम्मान का प्रतीक बन गया यह गीत आज भी पंजाब के आंदोलनकारियों की जुबान पर रहता है और पिछली बार किसान आंदोलन में अलग अलग आवाज में इसकी गूंज फिर गली गली सुनाई दे रही थी। इसी गीत की एतिहासिकता और लोकस्मृति में इसकी उपस्थिति ने भी किसान आंदोलन में अपनी अपनी भूमिका निभाने के लिए कलाकारों, गीतकारों और गायकों को प्रेरित किया।
पिछली बार किसानी आंदोलन में गिप्पी ग्रेवाल, कंवर ग्रेवाल, दलजीत सिंह दोसांझ फ्रंट लाइनर थे। मशहूर गायक हरभजन मान और मीका सिंह भी सोशल मीडिया पर किसानों के पक्ष में सक्रिय थे। गायक हरभजन मान ने पंजाब सरकार का सम्मान भी लौटा दिया था तो सुरजीत पातर ने भी पद्मश्री सम्मान लौटाने की घोषणा कर साहित्यकारों में आग पैदा कर दी थी।
पंजाबी संगीतकार सिद्धू मूसेवाला, बब्बू मान, जस बाजवा, हिम्मत संधु, आर नेत सब गायक व गीतकार किसानों के हक में खुलेआम चल रहे थे। किसान परिवार के कंवर ग्रेवाल एक युवा गायक हैं और उनका गीत ”फसलां दे फैसले किसान करांगा” हिट हुआ। गायकों में हर्फ चीमा, जैजी बी, रंजीत बावा जैसे गायकों का नाम भी था।
वहीं किसानी आंदोलन में मुख्य भूमिका निभाने वाले गीतकार व गायक इस बार दूर से नजर रख रहे हैं। किसान एंथम 3 रिलीज किया है, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। गाने में गायक बराड़ केंद्र सरकार पर तंज कसते सुनाई दे रहे हैं।
किसान जत्थेबंदियां बिखरीं
2020 के किसानी आंदोलन में किसान जत्थेबंदियां एकजुट थी और संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले सारा आयोजन चल रहा था। लेकिन इस बार किसान जत्थेबंदियां बिखरीं हुई हैं। संयुक्त किसान मोर्चा अपनी अलग राह पकड़े हए हैं जबकि सरवण सिंह पंधेर व डल्लेवाल सड़कों पर डटे हुए हैं। लिहाजा, पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के तमाम दिग्गज हालात पर नजर रख रहे हैं और अभी सीधे तौर पर किसानों के हक में नहीं उतर रहे हैं।