मोटर एक्सीडेंट का शिकार होने वाले कर्मचारियों के परिवारों के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बेहद अहम फैसला आया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि मोटर एक्सीडेंट की स्थिति में जो क्लेम जारी किया जाता है उससे ईएसआई से मिले लाभ की कटौती नहीं की जा सकती है।
14 अप्रैल 2013 को गुरुग्राम में एक्सीडेंट में देवेंद्र नामक व्यक्ति की मौत हो गई थी। मृतक देवेंद्र के पिता ने क्लेम के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल कर दी। ट्रिब्यूनल ने याची केपक्ष में फैसला सुनाया लेकिन जब क्लेम की राशि निर्धारित की गई तो बीमा कंपनी की दलील को मान लिया गया कि ईएसआई से मिली राशि को काट कर मुआवजा तय किया जाए। बीमा कंपनी की ईएसआई एक्ट के सेक्शन 53 का हवाला देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर क्लेम भुगतान को चुनौती दी। बीमा कंपनी ने कहा कि जब याची का परिवार ईएसआई एक्ट के तहत लाभ पा चुका है तो किसी और एक्ट के तहत दावा नहीं कर सकता।
याची के वकील ने कहा कि ईएसआई एक्ट कर्मचारी और नियोक्ता के लिए है और मोटर व्हीकल एक्ट का कर्मचारी या नियोक्ता से कोई संबंध नहीं है। ऐसे में ईएसआई एक्ट और मोटर व्हीकल एक्ट में कोई संबंध नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ईएसआई के लिए कर्मचारी के वेतन से एक हिस्सा लिया जाता है और कर्मचारी की मौत पर उसकी एवज में कर्मचारी के परिजनों को ईएसआई ने कुछ लाभ जारी कर दिया। यह क्लेम राशि नहीं है और इसलिए इसकी मोटर एक्सीडेंट क्लेम से कटौती नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने क्लेम के लिए निर्धारित पूरी राशि का भुगतान करने के बीमा कंपनी को आदेश दिए हैं।