पंजाब में पुलिस मुलाजिम अब किसी के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज नहीं कर पाएंगे। सूबे में वीडियो डिजिटल एफआईआर प्रणाली शुरू हो गई है।
गुरु नगरी अमृतसर से पायलट प्रोजेक्ट की शुरूआत की गई है। अमृतसर के पुलिस कमिश्नर जतिंदर औलख ने हाईकोर्ट में पेश किए हलफनामे में यह जानकारी दी है।
चीफ जस्टिस संजय किशन कौल पर आधारित खंडपीठ ने हलफनामे को रिकार्ड में लेकर स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश जारी किए। मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को होगी।
आशा रानी एवं अन्यों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर यह मामला उठाया है।
याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया गया कि पंजाब के प्रत्येक थाने में दर्ज होने वाले मुकदमे की बाकायदा वीडियोग्राफी की जाए और इसका जांच तक इसका पूरा वीडियो रिकार्ड रखने के निर्देश जारी किए जाएं।
याचिका में कुछ मामलों का हवाला देकर दलील दी गई कि पुलिस ने जानबूझकर कुछ लोगों को नशा तस्करी के मामले में फंसाया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि आपसी रंजिश के चलते पुलिस ऐसा कदम उठा रही है। मामले पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया था।
सरकार ने हाईकोर्ट में पेश हलफनामे में भरोसा जताया था कि जल्द ही तकनीक को उपयोग में लाया जाएगा।
सरकार पायलट प्रोजेक्ट के तहत बड़े थानों में यह विशेष तकनीक शुरू करने जा रही है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने हलफनामे को रिकार्ड में लेकर मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।