चंडीगढ़। तत्कालीन डीजीपी पंजाब सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय के फर्जी हस्ताक्षर कर 11 पुलिसकर्मियों की पदोन्नति सूची जारी करने के मामले में रिमांड पर चल रहे आरोपियों ने कई और खुलासे किए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि निरीक्षक सतवंत सिंह और बर्खास्त चल रहे उपनिरीक्षक सरबजीत सिंह ने डीजीपी के फर्जी हस्ताक्षर के जरिए यातायात पुलिस खरड़ के मुंशी संजीव कुमार को हवलदार से एएसआई और निरीक्षक सतवंत सिंह के साथ तैनात सिपाही सुखबीर को हवलदार के पद पर पदोन्नत किया था। यातायात मुंशी संजीव फिलहाल फरार है और उसका मोबाइल बंद है। पुलिस के अनुसार, वह कई दिनों से ड्यूटी पर नहीं आ रहा है।
एसआईटी ने सिपाही से हवलदार बने सुखबीर को पूछताछ के लिए बुलाया था। पूछताछ के बाद अदालत में उसके 164 के बयान दर्ज करवाए गए। एसआईटी अब डीजीपी ऑफिस में तैनात अन्य कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए बुला रही है। इनमें से कर्मचारियों से वीरवार को पूछताछ की गई। वहीं, मास्टरमाइंड हरविंदर सिंह अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के बाद ही इस मामले की परतें खुलेंगी कि अब तक फर्जी तरीके से कितने लोगों को पदोन्न्त किया गया है और उसके लिए कितने रुपये लिए गए हैं।
अब तक पांच आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
इस मामले में अब तक मोहाली फेज-6 निवासी व डीजीपी दफ्तर में तैनात सुपरिंटेंडेंट संदीप कुमार (55), हवलदार मानी कटोच (33), चंडीगढ़ सेक्टर-39 निवासी डीजीपी दफ्तर में तैनात सुपरिंटेंडेंट बहादुर सिंह (52), मोहाली के थ्री बी टू निवासी बर्खास्त उपनिरीक्षक सरबजीत सिंह (47) और फाजिल्का निवासी साइबर सेल मोहाली में तैनात निरीक्षक सतवंत सिंह (48) की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं पुलिस को अमित गुप्ता नाम के एक संदिग्ध की भी तलाश है।
डीजीपी के फर्जी हस्ताक्षर कर चार सूचियां जारी करने का हो चुका है खुलासा
डीजीपी के फर्जी हस्ताक्षर कर आरोपियों की ओर से अब तक चार सूचियों को जारी करने का खुलासा हो चुका है। इनमें 11 पुलिसकर्मियों की पदोन्नति सूची के अलावा दो लोगों को पंजाब पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती करवाने, निरीक्षक सतवंत सिंह की खराब एसीआर ठीक करवाने के अलावा दो अन्य मुलाजिमों की पदोन्नति सूची जारी करना शामिल है।