खुद को बचाने के लिए अधिकारी डाटा देने में कर रहे देरी
करोड़ों के घोटाले में हजारों की संख्या में आयुष्मान व हिम केयर से जुड़े मरीजों का फर्जी डाटा तैयार कर अमृत फार्मेसी से दवाइयां निकलवाई गईं। सूत्रों के अनुसार महंगी और अधिक पैसों में आने वाली दवाइयां अमृत फार्मेसी से लेकर आने के लिए डॉक्टरों के नाम वाली फर्जी मुहरें तैयार की गई थी। इसमें कई डॉक्टरों के भी नाम सामने आ सकते हैं। पीजीआई के अधिकारियों की भी इसमें संलिप्तता है। इस कारण जांच टीम ने आयुष्मान व हिम केयर का जो रिकॉर्ड तलब किया है, उसमें देने में आनाकानी की जा रही है।
क्या है मामला
बीते 18 फरवरी को पीजीआई के अमृत फार्मेसी में काम करने वाला सनप्रीत एक संदिग्ध व्यक्ति रमन को संदेह के आधार पर सुरक्षा नियंत्रण कक्ष में लेकर आया था। वह यूरोलॉजी वार्ड की आयुष्मान भारत इंडेंट बुक का उपयोग कर रहा था। इसके अलावा रमन के पास आयुष्मान भारत फार्मेसी वार्ड के नर्सिंग अधिकारी, वरिष्ठ रेजिडेंट की उपरोक्त इंडेंट बुक और 8 टिकटें थीं। उसके खिलाफ फर्जी मुहर व इंडेंट मिलने पर केस दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच करते हुए सह आरोपी कपिल कुंडल और अजय उर्फ गोपाल को गिरफ्तार किया। यह दोनों हिम केयर और आयुष्मान भारत मरीजों का डेटा मैनेज करते थे।
कार से आठ स्टाम्प सील हुई थी बरामद
जांच टीम ने 6 मार्च को बलराम को गिरफ्तार किया। बलराम की निशानदेही पर नवेदिता हॉस्टल पीजीआई में खड़ी उसकी कार से 8 स्टाम्प सील, 4 इंडेंट बुक और अमृत फार्मेसी से लाई गई दवाइयां बरामद की गईं। बलराम ने खुलासा किया कि उसने सुनील के माध्यम से विभिन्न विभागों की जाली मुहरें और इंडेंट बुक तैयार कर मरीजों के कार्ड का प्रबंधन किया। वह अमृत फार्मेसी के कर्मचारी राहुल के साथ मिलकर जाली दस्तावेजों पर बिल पास करता था ताकि फार्मेसी से दवाइयां प्राप्त कर सकें। वह इन दवाइयों को ब्रदर्स कैमिस्ट शॉप संचालक दुर्लभ जाटव को देता था। आरोपी दुर्लभ इसके लिए राहुल और बलराम को 15 प्रतिशत कमीशन देता था। बलराम के किराये के घर से भारी मात्रा में दवाइयां और 2.80 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई।