लोगों के शव कटे पटरी पर पड़े थे, कुछ लोग जो पटरी से बाहर जा गिरे, वह कराह रहे थे। महिलाएं चीख रही थी, सब अपने-अपने परिवार वालों की खोज कर रहे थे। आजमगढ़ के रहने वाले राकेश कुमार भी इस हादसे का शिकार हुए हैं। अमर उजाला के साथ बातचीत में यूपी के आजमगढ़ के रहने वाले राकेश ने बताया कि वह कृष्णा नगर में रहता है और पीओपी का काम करता है। अपने भाई जयप्रकाश, गांव के रहने वाले गुड्डू और मिलन के साथ दशहरा देखने आया था।
रावण दहन के बाद याद नहीं
हम लोग पटरी पर खड़े थे और रावण दहन तक तो सब कुछ याद है, उसके बाद अचानक तेज आंधी आई और सब कुछ चीरती चली गई। बस फिर मुझे कुछ याद नहीं, एक धक्का सा पड़ा था मुझे। 20 मिनट बाद पटरी के बाहर पत्थरों पर मैं पड़ा था, होश आया तो भाई जयप्रकाश को उठाया। गुड्डू की हालत ज्यादा खराब थी, खून बहुत बह रहा था। हमारी चीखों को कई सुन नहीं रहा था।
40 मिनट बाद आई एंबुलेंस
40 मिनट बाद एक एंबुलेंस आई तो उसमें बैठाकर अस्पताल लाया गया। नई जिंदगी देख रहा हूं, मेरा दोस्त मिलन ट्रेन से कट गया। बाकी तीनों जख्मी है। पूरा अंधेरा था, कुछ दिखाई नहीं दिया कि कब ट्रेन आ गई। आवाज तक सुनाई नहीं दी। हमारा पूरा ध्यान रावण दहन की तरफ था। मैं अब वह मंजर याद नहीं करना चाहता, मेरा दिमाग फट रहा है।