यूटी प्रशासन की ओर से वर्षों पहले अलाट की गई जमीन पर निर्माण न कराने वालों को अब प्रशासन को मोटी एक्सटेंशन फीस देनी होगी। यूटी प्रशासन अब इन सभी अलॉटियों को नोटिस भेजकर एक्सटेंशन फीस लेने की तैयारी कर रहा है।
इस नोटिस में यह स्पष्ट होगा कि वह अपने प्लॉट में निर्माण कार्य अब तभी शुरू कर पाएंगे अगर वह प्रशासन को एक्सटेंशन फीस देंगे। जो एक्सटेंशन फीस नहीं देंगे उनके प्लॉट रिज्यूम कर लिए जाएंगे।
प्रशासन ने सालों पहले कई सरकारी संस्थानों, राजनीतिक दलों, समाजसेवी संगठनों को उस समय के रेट के अनुसार प्लॉट अलॉट किए थे। इन प्लाटों पर अभी भी निर्माण कार्य नहीं हुआ है। इसी तरह से कई कामर्शियल और रिहायशी प्लॉट भी सालों से खाली पड़े हैं।
तीन साल में जमीन पर करना होता कंस्ट्रक्शन
यूटी प्रशासन के नियमों के अनुसार जमीन अलॉट होने के तीन साल के अंदर निर्माण कार्य पूरा करना होता है।
पहले प्रशासन देरी से निर्माण शुरू कराने वालों से एक्सटेंशन फीस नहीं वसूलता था, लेकिन अब प्लॉट अलॉटमेंट के चौथे साल अलॉटमेंट की राशि का 10 फीसदी, पांचवें साल 15 फीसदी, छठे साल 20 फीसदी और सातवें साल 25 फीसदी एक्सटेंशन फीस के तौर पर लिया जाएगा।
चंडीगढ़ प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि पंजाब सरकार के अलावा केंद्र सरकार के भी कुछ संस्थानों को सालों पहले जमीन अलॉट हुई थी, लेकिन उन्होंने निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया। अब उन्हें निर्माण कार्य शुरू कराने से पहले एक्सटेंशन फीस देनी होगी।
रद्द भी हो सकती है अलॉटमेंट
एक तरफ जहां प्रशासन निर्माण न करने वालों से एक्सटेंशन फीस वसूलने जा रहा है वहीं दूसरी तरफ प्रशासन ऐसे संस्थानों की अलॉटमेंट को रद करने की तैयारी कर रहा है, जिन्होंने अलॉटमेंट से पहले नियमों के तहत 25 फीसदी राशि जमा नहीं कराई थी।
यूटी में कई ऐसी संस्थाएं और सरकारी विभाग हैं जिन्होंने अलॉटमेंट के बाद 25 फीसदी आग्रिम राशि जमा नहीं कराई है। प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार इन संस्थाओं को प्रशासन अब नए सिरे से नए रेट पर जमीन अलॉट करेगा।