शहर की कई इमारतें भूकंप का एक झटका तक नहीं सहन कर सकती हैं। चंडीगढ़ के मास्टर प्लान में इन इमारतों पर पूरी रिसर्च करने के बाद नई योजना तैयार की गई है। मास्टर प्लान में ऐसी इमारतों की रेट्रोफिटिंग, दोबारा से तैयार करने और उनको रिन्यू करने की सिफारिश की गई है।
मास्टर प्लान के अनुसार चंडीगढ़ में बड़े पैमाने पर ऐसी इमारत हैं जिनमें बिल्डिंग कोड के प्रावधानों का ध्यान नहीं रखा गया। चंडीगढ़ हाई रिस्क जोन में है और दो दिन से लगातार शहर में भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं।
मास्टर प्लान में सेफ हाउसिंग की ओर ध्यान देते हुए स्पष्ट किया गया है कि यह सिस्मिक जोन फाइव में है। वहीं इमारतें इतनी कमजोर हैं जो कि कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।
मास्टर प्लान का ऑब्जर्वेशन
इमारतों में ढंग से ईंट नहीं लगाई गईं। ईंटों में भरा गया मसाला भी अपर्याप्त है।इमारतों की ज्यादातर दीवारें बिना प्लास्टर की हैं। इसकी वजह से साल्ट अटैक हो रहे हैं। यही नहीं, ऐसी स्थिति में दीवार ज्यादा टिकाऊ नहीं हैं।इमारत की ओपनिंग और चौड़ी खिड़कियों पर आरसीसी के लेंटर नहीं हैं।भूकंप से इमारत की सुरक्षा के लिए आरसीसी बैंड तक का उपयोग नहीं किया गया। चिनाई की दीवारें मजबूत नहीं है।इमारतों को तैयार करने में इंजीनियर की मदद तक नहीं ली गई। ऐसी स्थिति में चार मंजिला इमारतें भूकंप के दौरान घातक हो सकती हैं।दीवारों का वर्टिकल एलाइनमेंट ठीक नहीं है जिसकी वजह से अतिरिक्त दबाव हो सकता है।बिल्डिंग के दोनों ओर कैंटीलीवर प्रोजेक्शन की वजह से पर्याप्त स्थान नहीं है।चिनाई पर बिना किसी आधार के ऊपरी फ्लोर का भार पड़ रहा है। 10-कैंटीलीवर के स्लैब पर कई इमारतों की सीढ़ियां हैं जो कि बेहतर नहीं हैं।यहां चाहिए स्ट्रक्चरल ऑडिटिंग
सेक्टर-15, 19, 20, 24, 32 आदि के चीप हाउस में।बापूधाम और अन्य कालोनियों में।सेक्टर-25 की साइट और सर्विस स्कीम में।सेक्टर-29 बी, टीबीआरएल और सेक्टर-29 के ओएफसी हाउस में।मनीमाजरा के पुराने मकानों में, गोबिंदपुरा, मोरी गेट, देहरा साहिब माता राज कौर, दर्शिनी टावर और ठाकुर द्वार, शांति नगदर और पिपली वाला टाउन।