माऊंट एवरेस्ट को फतेह करने निकले बुड़िया के राशिद का एवरेस्ट पर हुए हिमस्खलन के बाद कोई अतापता नहीं है। राशिद के परिजन हर वक्त उसके फोन का इंतजार कर रहे हैं। मोबाइल की घंटी बजते ही उनके दिलों की धड़कनें तेज हो जाती हैं।
जगाधरी की गांधी नगर कालोनी निवासी राशीद ने छह अप्रैल को एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू की थी। राशिद के भाई तासीन ने बताया कि उसके ग्रुप में राशिद समेत छह भारतीय और आठ विदेशी पर्वतारोही हैं। गत 22 अप्रैल की शाम को राशिद का आखिरी बार फोन आया था।
उसने बताया कि वे कैंप एक और दो के लिए रवाना हो रहे हैं। शनिवार को नेपाल में आए जलजले और एवरेस्ट पर हुए हिमस्खलन के बाद से राशीद के परिजन चिंता में हैं। अब तक राशिद का फोन न आने से सभी चिंतित हैं और अल्लाह से राशिद की सलामती की दुआ मांग रहे हैं।
एवरेस्ट फतेह करने के लिए छोड़ी जॉब
24 साल के राशिद इलेक्ट्रानिक कम्यूनिकेशन में डिग्री हासिल करने के बाद कुछ समय तक प्राइवेट जॉब की। उसका इरादा कुछ अलग करने का था। इसलिए उसने एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचने का इरादा किया। इसके लिए राशिद ने अपनी जॉब छोड़ दी।
आर्थिक तंगी उसके आड़े आई, लेकिन लोगों की मदद से उसे एवरेस्ट चढ़ाई के लिए 25 लाख रुपये जुटाए। एवरेस्ट की चढ़ाई के लिए रवाना होने से पूर्व उसने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री, वित्त मंत्री जिला उपायुक्त, बुड़िया के पीर जी हुसैन और सुंदर लाल बतरा सहित अन्य का आशीर्वाद लिया।