कोरोना महामारी से जहां हर किसी की जिंदगी और कारोबार प्रभावित हुए हैं। वहीं फार्मा उद्योग को इन दो सालों में जबरदस्त संजीवनी मिली है। अकेले हरियाणा में ही फार्मा इंडस्ट्री का निर्यात 500 करोड़ से बढ़कर 1000 करोड़ तक पहुंच गया है। खास बात ये भी है कि धीरे-धीरे वो देश हरियाणा की तरफ रुख कर रहे हैं, जो पहले चीन पर निर्भर थे।
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो साल में देश की फार्माटेक इंडस्ट्री में ओवरऑल 15 प्रतिशत तक ग्रोथ हुई है, जबकि हरियाणा में 13 प्रतिशत तक है। मेडिकल इंजीनियरिंग सेक्टर में यह ग्रोथ 56 प्रतिशत तक बढ़ी है। इनके साथ-साथ मेडिसिन, मेडिकल डिवाइस, साइंस इंस्ट्रूमेंट और लैब इक्यूपमेंट के निर्यात में भी जबरदस्त उछाल आया है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021-22 में भारत का निर्यात 418 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जबकि दस साल पहले यह औसतन हर साल 320 बिलियन यूएस डॉलर रहता था।
इसलिए हरियाणा का निर्यात
दो साल पहले जब कोरोना महामारी आई तो अधिकतर देश चीन पर निर्भर थे लेकिन मात्र दो साल में ही भारत और हरियाणा में ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर और वेंटिलेटर का निर्माण शुरू हो गया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि क्योंकि चीन के उत्पादों की उम्र कम होती है और चीन करार के बाद उत्पादों के रेट बढ़ाकर एकाधिकार करता है। इसलिए धीरे-धीरे यूएई, यूएस, अफ्रीकी देश समेत अन्य देश चीन को छोड़कर भारत और हरियाणा की तरफ रुख कर रहे हैं। क्योंकि भारतीय उत्पाद गुणवत्ता में अच्छे हैं और करार के अनुसार डील होती है। उद्योगपति अरुण शुक्ला ने बताया कि कोरोना के चलते फार्मा उपकरणों की विदेश में मांग बढ़ी है। इसी का असर है इंडस्ट्री तरक्की की ओर बढ़ रही है।
एक्सपो से 50 करोड़ के करार की उम्मीद
चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में 30 अप्रैल तक चलने वाले फार्मा टेक और लैब टेक एक्सपो से भी हरियाणा सरकार को खासी उम्मीद है। उम्मीद है कि कुल 5 हजार से अधिक लोग यहां पर पहुंचेंगे। एक्सपो से करीब 50 करोड़ रुपये के करार होने के आसार हैं। इसमें कुल 200 कंपनियां हिस्सा ले रही हैं, जिनमें से हरियाणा की 40 नामी कंपनियां शामिल हैं।
कोरोना काल में फार्मा उद्योग ने खुद को साबित किया है। देश समेत हरियाणा का निर्यात बढ़ना इसका सबूत है। अब यूरोप समेत अफ्रीकी देश चीन से मुंह मोड़कर भारत, हरियाणा से करार कर रहे हैं। मेक इन इंडिया अभियान के तहत अब वो उपकरण भी यहां बनने लगे हैं, जो दो साल पहले चीन से आयात किए जाते थे। - डॉ. राकेश सूरज, क्षेत्रीय निदेशक, ईईपीसी, दिल्ली।