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सबसे बड़ा मुद्दा: अत्यधिक दोहन से लगातार गिर रहा भूजल स्तर, डार्क जोन में पंजाब का 78 प्रतिशत हिस्सा

Fri, 22 Mar 2024 05:02 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

केंद्रीय भूजल बोर्ड की नवंबर 2023 की रिपोर्ट में कहा गया है कि भूजल का बेलगाम दोहन पंजाब को अगले दो दशक में सूखाग्रस्त प्रदेश की शक्ल दे देगा। वर्ष 2039 तक पंजाब में भूजल स्तर 1000 फीट तक गिर जाएगा, जो आज 450 फीट तक पहुंच चुका है। पंजाब का 78 फीसदी क्षेत्र भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण डार्क जोन बन चुका है और केवल 11.3 फीसदी क्षेत्र ही सुरक्षित रह गया है। राज्य में 138 में से 110 ब्लॉक डार्क जोन में हैं।
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भूगर्भ जल दोहन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चुनाव कोई भी हो, जनता के मुद्दे हमेशा राजनीतिक आरोपों-प्रत्यारोपों में दब कर रह जाते हैं। पंजाब में एक बार फिर चुनाव का माहौल गर्मा गया है, लेकिन लोगों से जुड़े मुद्दों पर कोई दल बात नहीं कर रहा। गिरता भूमिगत जल स्तर पंजाब के लिए बड़ी चिंता का विषय है, लेकिन कोई इस पर बात नहीं कर रहा। 

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मालवा के सभी 14 जिलों में अत्यधिक दोहन
पंजाब के मध्य और दक्षिणी जिले- बरनाला, बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब, होशियारपुर, जालंधर, मोगा, एसएएस नगर, पठानकोट, पटियाला और संगरूर, सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां भूजल स्तर में गिरावट की औसत वार्षिक दर 0.49 मीटर प्रति वर्ष आंकी गई है। केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा 2020 में किए गए ब्लॉक-वार भूजल संसाधन मूल्यांकन के अनुसार श्री मुक्तसर साहिब जिले को छोड़कर, मालवा क्षेत्र के सभी 14 जिलों के अधिकतर ब्लॉकों में भूजल स्तर का अत्यधिक दोहन हुआ है। इसमें संगरूर, मालेरकोटला और बरनाला जिले के 75 गांव भी शामिल हैं। 

बोर्ड की रिपोर्ट में पूरे पंजाब की जो स्थिति पेश की गई है, उसके अनुसार 110 ब्लॉक यानी करीब 78 फीसदी क्षेत्र में भूजल का अत्यधिक दोहन हुआ है और यह क्षेत्र डार्क जोन बन चुका है। इसके अलावा 4 फीसदी क्षेत्र में भूजल की स्थिति गंभीर है और स्तर 400 से 500 फुट तक गिर चुका है। राज्य का 6.7 फीसदी क्षेत्र ऐसा है, जहां भूजल स्तर 300 फुट तक उतर गया है।
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एनजीटी ने भी चेताया, 300 मीटर से नीचे चला जाएगा जल स्तर
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की निगरानी समिति ने भी हाल ही में घोषणा की थी कि पंजाब का भूजल वर्ष 2039 तक 300 मीटर से नीचे चला जाएगा। दरअसल, वर्ष 2000 में राज्य में 110 फुट पर भूजल उपलब्ध था और दो दशकों बाद अब 450 फुट पर पहुंच गया है।

ट्यूबवेलों की निर्भरता भी जिम्मेदार
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किए गए अध्ययन में भूजल स्तर की गिरावट के लिए ट्यूबवेलों पर निर्भरता और नहरी सिंचाई व्यवस्था की कमी को जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में वर्ष 1970-71 तक लगभग 190,000 ट्यूबवेल थे, जो मुफ्त या सब्सिडी वाली बिजली की उपलब्धता के बाद 2011-12 तक बढ़कर 10.38 लाख हो गए। 2020 में इनकी संख्या लगभग 24 लाख तक पहुंच चुकी है, जबकि ट्यूबवेल लगवाने के लिए किसानों को अब 500 फुट तक गहरे बोर करवाने पड़ रहे हैं।

72 फीसदी भूमि पर सिंचाई का काम ट्यूबवेलों से
पंजाब की 72 फीसदी भूमि पर सिंचाई का काम ट्यूबवेलों से और शेष 28 फीसदी नहरी पानी से की जा रही है। पंजाब में खेती योग्य 104 लाख एकड़ जमीन में से सात फीसद की सिंचाई ही नहरों पर निर्भर है। पंजाब को हर साल सिंचाई के लिए करीब 54 एमएएफ पानी की जरूरत है, जिसमें से 14 एमएएफ पानी तो नहरों से मिलता है, जबकि शेष के लिए भूजल पर निर्भर रहना पड़ता है। जमीन से भी हर साल 14 से 15 लाख ट्यूबवेलों से लगभग 30 एमएएफ पानी निकाला जा रहा है। भाखड़ा डैम की लाइव स्टोरेज कैपेसिटी करीब 5.6 एमएएफ है। इस आधार पर जमीन के नीचे से निकलने वाला पानी इसके मुकाबले करीब पांच गुना अधिक है। पंजाब हर साल 5 बांधों की स्टोरेज कैपेसिटी जितना पानी जमीन के नीचे से निकाल लेता है।

कैसे हो सकता है बचाव
-पानी की रीचार्जिंग : किसान संगठन मांग करते आ रहे हैं कि बारिश के पानी की रीचार्जिंग के लिए कदम उठाए जाएं या इस पानी की स्टोरेज के लिए प्रयास हों, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा।
-स्टोरेज के लिए सब्सिडी: पानी और किसानों को बचाने के लिए वाटर रीचार्ज और स्टोरेज के लिए सरकार को सब्सिडी देनी चाहिए, जिससे भविष्य के खतरों से बचा जा सके।
-धान का विकल्प: धान की फसल किसानों को धान की फसल के जाल से निकालना होगा। इसके लिए वैकल्पिक फसलों के न केवल सरकारी रेट तय हों, बल्कि उनकी सरकारी खरीद के प्रबंध भी करने होंगे।

क्या कहते हैं किसान नेता
1. एसवाईएल से बड़ा मुद्दा जमीन के नीचे के पानी

भारतीय किसान यूनियन उगराहां के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष झंडा सिंह कहते हैं कि पानी को बचाने के लिए सरकारें गंभीर ही नहीं हैं। एसवाईएल से बड़ा मुद्दा जमीन के नीचे के पानी को बचाने का है। जिस तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा। भूजल स्तर गिरने से मोटरें बदलनी पड़ रही हैं, किसान बर्बाद हो रहे हैं। इसका फायदा मोटरें बनाने वाली कंपनियां ले रही हैं। किसान गरीब हो रहा है और कंपनियां मालामाल हो रही हैं।

2. सियासी लड़ाई रोककर जमीनी लड़ाई शुरू होनी चाहिए
किसान नेता शिंगारा सिंह मान ने कहा कि पानी पर सियासी लड़ाई रोककर जमीनी लड़ाई शुरू होनी चाहिए। डैम बनाकर, खेतों में बोर और तालाब बनवाकर बाढ़ व बारिश के पानी को रोकना होगा। वाटर रीचार्जिंग के प्रबंध करने होंगे, ताकि भविष्य के खतरों से निपटा जाए। इससे बाढ़ में जान-माल के नुकसान से भी बचा जा सकेगा। पंजाब ही नहीं हरियाणा भी इस ओर ध्यान दे।

एक्सपर्ट की राय...
हमारे पास सिर्फ 16 साल ही बचे हैं : सीचेवाल

राज्यसभा सांसद और पर्यावरणविद् बलबीर सिंह सीचेवाल का कहना है कि पंजाब में भूजल के दोहन में कमी नहीं आई है और हमारे पास अब 16 साल ही बचे हैं। हालात बहुत नाजुक हैं। इसे रोकना होगा वरना पंजाब को खत्म होने से कोई नहीं रोक सकता। राज्य सरकार ने नहरी पानी का उपयोग करके सिंचित क्षेत्र को 30 से बढ़ाकर 70 फीसदी करने का निर्णय लिया है, जिससे सिंचाई के लिए भूजल निकासी में कमी आएगी। सरकार इस समस्या से निपटने के लिए लेजर-स्तरीय सिंचाई को बढ़ावा दे रही है और ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों की स्थापना के लिए किसानों को सब्सिडी दी जा रही है। पहले नहरी पानी का एक बड़ा हिस्सा सिंचाई में बहुत कम उपयोग हो पाता था, क्योंकि डिस्ट्रीब्यूटरीज के खराब निर्माण और रखरखाव में लापरवाही के चलते खेतों तक पूरा नहरी पानी नहीं पहुंच पाता था। आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने इस स्थिति में सुधार के लिए कदम उठाए हैं और किसानों के खेतों की टेल तक नहरी पानी पहुंचाने का काम शुरू किया गया है।

पंजाब में भूजल का स्तर घटने से हमारे 78 प्रतिशत ब्लॉक डार्क जोन में पहुंच चुके हैं। यह चिंता का विषय है। हमें मिलजुल कर पंजाब को इस संकट से बाहर निकालना होगा। यही कारण है कि पंजाब किसी अन्य राज्य को पानी नहीं दे सकता। - भगवंत मान, मुख्यमंत्री पंजाब

बदलाव के नाम पर पंजाब सरकार ने ऐसी चाल खेली है कि अपने ही पानी के लिए आज पंजाब तरस रहा है। पंजाब के किसान पानी पाने के लिए बेहाल हैं। केजरीवाल चाहते हैं कि पंजाब का पानी चुनाव नजदीक आने के कारण राजस्थान को दे दिया जाए। - सुखबीर बादल, प्रदेश अध्यक्ष, शिअद

पंजाब को आज केवल 12.24 एमएएफ पानी मिल रहा है, जबकि बिना एसवाईएल वाले हरियाणा को पहले से ही पंजाब से ज्यादा 13.30 एमएएफ पानी मिल रहा है। पंजाब को आने वाले जल संकट से बचाने के भूजल को बचाना बहुत जरूरी है। - सुनील जाखड़, प्रदेशाध्यक्ष भाजपा

हम किसी अन्य राज्य को पानी की एक बूंद भी देने में सक्षम नहीं हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान को केंद्र सरकार पर यह सुनिश्चित करने के लिए दबाव डालना चाहिए कि इस मुद्दे का सौहार्दपूर्ण समाधान हो। भूजल को बचाने के लिए सबको साथ आना चाहिए। - अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, प्रदेशाध्यक्ष, कांग्रेस

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