चंडीगढ़। पीजीआई के ओरल हेल्थ साइंसेज सेंटर में 23 से 25 अक्तूबर तक ऑर्थोग्नैथिक सर्जरी पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इसमें देशभर से 150 से अधिक विशेषज्ञ, चिकित्सक और स्नातकोत्तर विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। कार्यशाला में जबड़े की गंभीर विकृतियों को दूर करने की आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और उपचार के बेहतर परिणामों पर चर्चा की जा रही है।
कार्यशाला के पहले दिन मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. विद्या रतन ने लाइव सर्जरी का प्रदर्शन किया। इससे प्रतिभागियों को जटिल ऑपरेशन की योजना बनाने, उपचार प्रक्रिया और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी मिली।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऑर्थोग्नैथिक सर्जरी उन मरीजों के लिए उपयोगी है, जिनके जबड़े और दांतों की गंभीर बनावट संबंधी समस्याएं केवल ब्रेसेज से ठीक नहीं हो पातीं। सर्जरी से भोजन चबाने, बोलने और दांतों के सही तालमेल में सुधार किया जा सकता है। कुछ मरीजों में यह नींद के दौरान सांस लेने में रुकावट की समस्या दूर करने में भी मददगार होती है।
वैज्ञानिक सत्रों में पीजीआई के डॉ. संजीव वर्मा, डॉ. विनय कुमार और डॉ. राज कुमार वर्मा तथा हैदराबाद के डॉ. श्रीनिवास गोसला रेड्डी ने व्याख्यान दिए। चर्चा में ऑर्थोडॉन्टिक्स और मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के समन्वय, चेहरे की बनावट में सुधार और सर्जरी के बाद बेहतर व स्थायी परिणामों पर जोर दिया गया। कार्यशाला का आयोजन इंडियन ऑर्थोडॉन्टिक सोसाइटी के तत्वावधान में किया जा रहा है।