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पूर्व रेलमंत्री बंसल से सुनिए, कैसा है रेल बजट

Wed, 09 Jul 2014 09:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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इस रेल बजट में एक भी चीज ऐसी नहीं थी जिसे नया कहा जा सके। यह बजट पूरी तरह से निराशाजनक रहा। लोगों को सपने दिखाए गए थे कि उन्हें आसमान से चांद लाकर दिया जाएगा लेकिन हकीकत सबके सामने है। इस सरकार ने सबसे ज्यादा रेल किराया बढ़ाया। जो घोषणाएं पहले हो चुकी हैं या जिन पर पहले से काम चल रहा है, उन्हें इस बार बजट में शामिल कर यह दिखाने की कोशिश की गई है कि वे कुछ नया कर रहे हैं।
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मैं मानता हूं कि कोई भी नई सरकार जब आती है तो वह पुरानी सरकार के कामों को आगे ले जाती है। लेकिन, बजट में कुछ तो नया होना चाहिए था जिससे यह लगे कि मोदी सरकार ने अपने पहले बजट में कुछ किया। बजट में सरकार का कोई विजन नजर नहीं आया। यह बजट तो मात्र दस मिनट में पढ़ा जा सकता था। बजट में हमारी सरकार की आलोचना हुई है लेकिन इस बजट में अधिकतर बातें पिछले दो रेल बजट से ही उठाई गई हैं।

रेल बजट में पीपीपी और एफडीआई का उल्लेख है। जब हमारी सरकार ने एफडीआई या पीपीपी की बात की थी तो भाजपा ने इसका कड़ा विरोध किया। अब जब उनकी सरकार है तो वही बात खुद कर रहे हैं। मैं निजी तौर पर इसका विरोध नहीं करता हूं क्योंकि यह समय की जरूरत है। इस रेल बजट में रेलवे के स्टापेज की समीक्षा करने का उल्लेख है। जो भी स्टापेज हैं, उन्हें बहुत ही सोच समझ कर तय किया गया है।
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लोगों की मांगों को ध्यान में रखकर। ऐसे अगर स्टापेज कम कर दिए जाएंगे तो एक स्टेशन से दूसरे स्टेशनों के लिए कई ट्रेनों को चलाना पड़ेगा। हमारी सरकार द्वारा जिन रेल लाइनों के सर्वेक्षण का उल्लेख रेल बजट में किया गया था, उसे बिना सोचे समझे रेल बजट में तर्कहीन करार दे दिया गया।  

पिछले साल मैंने रेल बजट में स्किल डेवलपमेंट की बात कही थी जिसके तहत युवाओं को ट्रेनिंग दी जा सके। इस बजट में रेल मंत्री ने यही घोषणा कर दी। सिर्फ इंक्यूबेशन सेंटर और जोड़ दिया। बुलेट ट्रेन या हाई स्पीड ट्रेन की घोषणा हुई। यह भी नई नहीं है। प्रीमियम ट्रेनों की घोषणा इस साल पेश हुए अंतरिम रेल बजट में हो चुकी है। साफ-सफाई के लिए जो हमने कदम उठाए उसका ही उल्लेख रेल बजट में कर दिया गया।
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- पवन कुमार बंसल, पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री
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