हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा प्रदेश की भाजपा सरकार की ओर से लाए गए श्वेत पत्र के जवाब में बुधवार को अपने कार्यकाल का लेखा-जोखा लेकर सामने आए।
उन्होंने भाजपा सरकार के उस दावे को झूठा करार दिया, जिसमें सरकारी खजाना खाली मिलने की बात कही गई थी। हुड्डा ने कहा कि उन्होंने सरकारी खजाने में 18591 करोड़ रुपये छोड़े हैं।
अपने निवास पर प्रेस कांफ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री ने 189591 करोड़ रुपये का हिसाब भी पत्रकारों के सामने रखा। बताया कि भाजपा सरकार ने श्वेत पत्र में जो आंकड़े दर्शाए हैं, वे गुमराह करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि किसी एक मद में हुए खर्च को अलग-अलग भाग में दिखाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई है।
प्रदेश के जिलों में विकास कार्य कराने के मामले में भेदभाव के आरोप का जवाब देते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि श्वेत पत्र में जिन जिलों में ज्यादा खर्च दिखाया गया है, वहां भाजपा सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए दी गई मुआवजा राशि को भी खर्च में दर्शाया है। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में मुआवजा बांटने की स्थिति नहीं थी, वहां खर्च कम दिखाया गया है।
हुड्डा ने कहा कि भाजपा सरकार का झूठ इसी बात से साफ हो जाता है कि मुख्यमंत्री खट्टर गुजरात जाकर हरियाणा को नंबर एक बताते हैं और हरियाणा में आकर प्रदेश को नंबर 11 बताते हैं।
उन्होंने कहा कि श्वेत पत्र भी भाजपा का जुमला पत्र ही है। हुड्डा ने कहा कि भाजपा सरकार ने अपनी विफलताओं को छुपाने और चुनाव में किए गए वादों से लोगों का ध्यान हटाने केलिए यह नाटक रचा है। पूर्व सीएम ने कहा कि भाजपा ने चुनाव से पहले 154 वादे किए थे, जिनमें से एक भी पूरा नहीं किया गया। उन्होंने चुनौती दी कि यदि भाजपा सरकार में हिम्मत है तो वे श्वेत पत्र को विधानसभा के चालू बजट सत्र में सदन पटल पर रखे।
अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए हुड्डा ने कहा कि साल 2004-05 में प्रदेश सी जीएसडीपी में चार गुना इजाफा हुआ। पूरे दशक में जीएसडीपी की ग्रोथ रेट लगातार बनी रही। साल 2004-05 में यह दर 44 फीसदी थी, जो साल 2013-14 में 57 फीसदी दर्ज की गई। उन्होंने प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय का विवरण देते हुए बताया कि साल 2004-05 में प्रति व्यक्ति आय 37972 रुपये थी जो 2013-14 में बढ़कर 1,33,427 रुपये हो गई।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के समय राज्य में बिक्री कर, स्टांप ड्यूटी, एक्साइज और रोड टेक्स वसूली में लगातार इजाफा होने के आंकड़े भी प्रेस कांफ्रेंस में पेश किए। कर्ज लिए जाने के बारे में पूछे गए सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय वित्त आयोग के नियमानुसार सीएसडीपी के22.8 फीसदी हिस्से से ज्यादा कर्ज नहीं लिया जा सकता। उनकी सरकार ने इस नियम का पालन करते हुए ही कर्ज लिया। मुख्यमंत्री रहते उन्होंने किसी जिले से भेदभाव नहीं किया और पूरे प्रदेश का समान विकास कराया।