जसपाल सिंह ने बताया कि हादसे के समय उनकी देहरादून में पोस्टिंग थी। ऐसे में आर्मी को सूचना नहीं दे पाए। सेना ने उसे गैरहाजिर मान लिया। साथ ही उसे वहां पर सेना ने 14 दिन जेल की सजा दी। इसके बाद उन्हें जून 1988 में मेडिकल अनफिट कर दिया लेकिन पेंशन नहीं दी गई।
वह काफी समय तक संघर्ष करते रहे। आखिरी में उन्होंने एक्स सर्विसमैन ग्रीवांसेस सेल के सहयोग से अदालत में केस दायर किया। अदालत में उनके वकील ओझा ने इस मामले को गंभीरता से उठाया जिसके बाद उसकी पेंशन की राह साफ हो पाई है।
भैंसे और खेती कर बच्चे पाले
पूर्व फौजी ने बताया कि उनकी दो बेटियां और एक बेटा था। आर्मी से घर आने के बाद उनकी पेंशन तो लगी नहीं थी। ऐसे में गुजारा करना मुश्किल था। उन्होंने भैंसे पाली। दूध बेचकर व खेती से उन्होंने रुपये कमाए और किसी तरह अपना घर चलाया।
आंखों के आगे बेटा चला गया
जसपाल सिंह ने बताया कि उनकी मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही है। कुछ समय पहले उनके नौजवान 24 वर्षीय बेटे की सड़क हादसे में मौत हो गई, जिसका एक ढाई साल का बेटा भी है। पूरा परिवार नौजवान बेटे की मौत से आहत है।