इस समय चारों ओर कोरोना की ही चर्चा है। घरों में बच्चे भी इस पर सवाल पूछ रहे हैं। लिहाजा बच्चों समेत बड़ों के दिमाग पर भी असर पड़ रहा है। डब्ल्यूएचओ ने भी कोरोना के भय से मेंटल हेल्थ पर पड़ रहे प्रभाव को स्वीकारा है। यह बात पंजाब यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञानी प्रो. रोशन लाल ने कही।
उन्होंने कहा, ‘बच्चों की मेंटल हेल्थ तभी बेहतर रह सकती है जब बच्चों के दिमाग में आ रहे हर सवाल का जवाब अभिभावक दें। यह भी नहीं कि एक-एक बच्चे को समझाएं। घर के सभी बच्चों को एक साथ बैठाएं और बारी-बारी से उनके सवाल जानते हुए जवाब दिए जाएं। जब बच्चे संतुष्ट हो जाएंगे तो उनके दिमाग पर यह कोरोना का भय असर नहीं डालेगा।’
प्रो. रोशन लाल ने ये टिप्स दिए
- कोरोना के भय को दूर करने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन के बीच बैलेंस बनाएं।
- ऑनलाइन जो भी भ्रामक सूचनाएं आ रही हैं उनसे दूरी बनाएं और बच्चों के सवालों के जवाब ऑफलाइन पॉजिटिव होकर दें।
- अगर वाट्सएप के जरिये ऐसे मैसेज आ रहे हैं उसे ब्लॉक कर दें।
- बच्चों को यह भी समझाएं कि जो यह चल रहा है सब एक कहानी है जो कुछ दिन के बाद खत्म हो जाएगी।
- बच्चों का सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक का टाइम टेबल बनाना बनाएं।
- कुछ समय समाचार आदि के लिए भी तय करें। दिनभर घर में कोरोना के समाचार न चलाएं।
- बच्चों का खेल में ध्यान भी लगाना जरूरी है, ताकि उनके दिमाग डायवर्ट हो जाए।
- हर परिवार अपना एक प्लान बनाए। हर दिन कुछ करने के लिए नई योजना बनेंगी तो बच्चों का दिमाग उस तरह लग जाएगा।
- इस बात का ध्यान रखें कि पड़ोसी या किसी अन्य परिवार का प्लान कॉपी न करें।
- ऐसा करने से कोरोना के बीच बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेेगा।