चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित विंटर थिएटर फेस्टिवल के दूसरे दिन सेक्टर - 18 स्थित टैगोर थिएटर में थिएटर फार थिएटर ग्रुप की ओर से संध्या छाया नाटक का मंचन किया गया।
नाटक का निर्देशन सुदेश शर्मा की ओर से किया गया। इसमें आठ कलाकारों ने बेहतरीन मंचन किया। नाटक में दिखाया गया कि लोग अपने को सु़खी रखने के लिए मां- बाप को भी छोड़ देते हैं। 90 मिनट का नाटक देखकर लोग भावुक हो गए।
नाटक के माध्यम से कलाकारों ने दर्शाया कि एक नाना नाम के व्यक्ति के पास दो बेटे हैं। नाटक के माध्यम से आज के युवाओं का अपने पैरेंट्स पर ध्यान नहीं देने पर कटाक्ष किया गया।
नाना का बड़ा बेटा फौज में रहता है। वह जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद हो जाता है। उसका छोटा बेटा श्याम अमेरिका चला जाता है। वह वहीं सेटल हो जाता है। श्याम के माता- पिता उसे कई बार वहां से बुलाने की कोशिश करते हैं लेकिन वह वापस नहीं आता है।
वे बहुत बूढ़े हो जाते हैं। इस हालात पर उनकी देखरेख उनका नौकर महाटू करता है। वह कई बार अकेले होने से परेशान रहते हैं। आपसी झगड़ों से परेशान होने के बाद श्याम के मां- बाप एक दिन जहर खाने की कोशिश करते हैं।
लेकिन तभी उनके दरवाजे की घंटी बजती है और एक आदमी अपने बच्चे के साथ पता पूछता है। इस पर वह उससे पूछते हैं कि तुम्हे काम चाहिए। वह हां कहता है। इस पर उसे वह अपने घर में रख लेते हैं।
उस छोटे बच्चे से बातचीत के सहारे वह अपना बचा हुआ जीवन जीने की सोचते हैं। कलाकारों की प्रस्तुति देखने के बाद पूरा टैगोर थिएटर का ऑडिटोरियम तालियाें की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।