चंडीगढ़। जिला अदालत ने 20 हजार रुपये रिश्वत के मामले में 6 साल पहले गिरफ्तार हुए एस्टेट आफिस इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार चोपड़ा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत में शिकायतकर्ता अपने बयान से मुकर गया। वकील ने बहस के दौरान कहा कि कृष्ण को इस केस में फंसाया गया था। उन्होंने शिकायतकर्ता से कोई रिश्वत नहीं मांगी थी। अदालत में सुनवाई शुरू हुई तो शिकायतकर्ता रविंद्र कुमार ने कहा कि वह तो कृष्ण कुमार चोपड़ा को जानता ही नहीं है। न ही उसने उससे रिश्वत मांगी थी।
चोपड़ा के खिलाफ सेक्टर-37 निवासी सेक्टर-37 निवासी रविंद्र कुमार ने रिश्वत मांगने के आरोप लगाए थे। इस मामले में विजिलेंस ने रविंद्र की शिकायत पर वर्ष 2019 में केस दर्ज किया था। उसने शिकायत में बताया था कि उसने सेक्टर-38 में एक मकान पावर आफ अटार्नी पर खरीदा था। उस मकान की किस्तें बकाया थीं। इस्टेट आफिस उसे रद्द करने जा रहा था। शिकायतकर्ता ने एरिया इंस्पेक्टर मदन लाल से बात की। मदन लाल ने उससे 50 हजार रुपये रिश्वत मांगी। फिर उसकी मुलाकात कृष्ण चोपड़ा से हुई। उसने 70 हजार रुपये की मांग की। इस दौरान रविंद्र ने उसकी रिकार्डिंग कर विजिलेंस को शिकायत दे दी। विजिलेंस ने 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए कृष्ण चोपड़ा को पकड़ लिया। विजिलेंस ने इस मामले में मदन लाल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, उल्टा उसे क्लीन चिट देकर इस केस में गवाह बना लिया था।