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विभाग गया भूल, सात करोड़ से लगे स्मार्ट कक्षाओं के उपकरण फांक रहे धूल

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चंडीगढ़। सरकार ने छात्रों को स्मार्ट बनाने के लिए पांच साल पहले ही शहर के सरकारी स्कूलों के 200 कमरों को स्मार्ट कक्षाओं में तब्दील किया था। वहीं आज इन कक्षाओं में लगे उपकरण धूल फांक रहे हैं, क्योंकि निजी कंपनी की ओर से इनका संचालन होता था जिसका रिनुअल ही नहीं हो पाया।
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हैरत की बात यह है कि पांच साल पहले जो संसाधन शिक्षा विभाग को मिले थे, उनका बेहतर उपयोग कोरोना काल में होता, लेकिन अनदेखी व लापरवाही के कारण नहीं हो पाया। हालांकि स्मार्ट कक्षाओं का संचालन कोरोना काल से पहले हुआ था, लेकिन जरूरत तब अधिक थी। शिक्षा विभाग का दावा है कि वह स्मार्ट कक्षाएं चलाने के लिए नई कंपनी का चयन करेगा।
इस तरह आगे बढ़ा था प्रस्ताव
शिक्षा विभाग की ओर से वर्ष 2016 में ही सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाने के लिए विभिन्न स्कूलों के लगभग 200 कमरों को स्मार्ट कक्षाओं में तब्दील किया गया। इसमें कक्षाओं में एलसीडी प्रोजेक्टर, कंप्यूटर और अन्य ऑडियो-विजुअल सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई थी। इन सबका उपयोग शिक्षक अब महामारी के समय में ऑनलाइन कक्षाएं लेने में कर सकते थे, लेकिन पिछले एक साल से स्मार्ट कक्षाएं संचालित करने वाली कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के कारण ये उपकरण संचालित ही नहीं हो रहे हैं। शिक्षकों ने बताया कि सभी कक्षाओं पर लगभग सात करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। अब संसाधनों की जरूरत पड़ रही है, क्योंकि बच्चों की पढ़ाई करवानी है।
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यह है शिक्षकों की पीड़ा
शिक्षकों ने बताया कि कोरोना महामारी को लगभग दो साल हो गए हैं, लेकिन विभाग की ओर से कक्षा से लाइव ऑनलाइन कक्षाओं के लिए न तो ट्राइपॉड उपलब्ध करवाए गए हैं और न ही लैपटॉप हैं। बिना ट्राइपॉड के शिक्षक कक्षाओं से कैसे लाइव लेक्चर की वीडियो बनाएं। अधिकांश स्कूलों में इंटरनेट की भी सुविधा पर्याप्त नहीं है, कई स्कूलों ने बाहरी मदद से वाई-फाई की सुविधा ली है। अभी बच्चों को शिक्षा विभाग की ओर से उपलब्ध करवाए सेंट्रलाइज्ड लेक्चर भेजे जाते हैं। वहीं वर्कशीट और स्कूल होमवर्क बच्चों के अभिभावकों को स्कूल बुलाकर दिया जाता है। बच्चे उसे पूरा करने के बाद अभिभावकों के हाथ उसे वापस स्कूल भिजवा देते हैं। शिक्षकों ने बताया कि सुविधाओं के अभाव में सरकारी स्कूलों में व्यावहारिक रूप से ऑनलाइन कक्षाएं संभव नहीं हैं।
इन स्कूलों में हैं स्मार्ट कक्षाएं
जीएचएस और जीएमएसएसएस सारंगपुर, जीएमएसएसएस-19, जीएमएसएसएस-35, जीएमएसएसएस-20, जीएमएसएसएस-18, जीएमएसएसएस-26 टिंबर मार्केट, जीएचएस -54 और जीएमएचएस धनास के 200 कमरों को स्मार्ट कक्षाओं में तब्दील किया गया था। लाइसेंस रिन्यू नहीं होने के कारण इनका संचालन नहीं हो रहा है।
बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर देंगे वर्कशीट
स्कूल प्रमुखों के साथ ऑनलाइन कक्षाओं को लेकर बैठक स्कूलों में कोरोना महामारी के कारण शिक्षकों का 50 प्रतिशत का रोस्टर बनाने के निर्देश दिए गए हैं। ऑनलाइन कक्षाओं को लेकर मंगलवार को सरकारी स्कूलों के प्रमुखों के साथ बैठक ली गई है। इसमें तय हुआ कि बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर उन्हें वर्कशीट दी जाएगी।
जल्द शुरू की जाएंगी स्मार्ट कक्षाएं
स्मार्ट कक्षाओं के लाइसेंस का कांट्रैक्ट खत्म है, इसे लेकर रिव्यू बैठक रखी है। आगामी दिनों में इसे ठीक करवाया जाएगा, जिससे इसका उपयोग ऑनलाइन कक्षाएं लेने में हो सके। स्कूलों में इंटरनेट की समस्या भी है, इसमें सुधार पर भी योजना बना रहे हैं। अगले हफ्ते दो सरकारी स्कूलों बुड़ैल और करसन में शिक्षा विभाग स्मार्ट कक्षाओं का उद्घाटन करेंगे, इसका भी बच्चों को लाभ जल्दी मिलेगा। - पालिका अरोड़ा, शिक्षा निदेशक, यूटी
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