चंडीगढ़। मास्टर प्लान-2031 के लिए गठित स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष शहर के उद्यमियों ने एक लेंटर पर दो इंडस्ट्री वाले औद्योगिक प्लॉटों का मुद्दा उठाते हुए एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) के लिए अलग प्रावधान करने की मांग की। उद्यमियों ने स्क्रीनिंग कमेटी की चेयरपर्सन प्रेरणा पुरी से कहा कि मौजूदा नियमों के कारण ऐसे प्लॉटों पर विस्तार करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल यूथ एसोसिएशन के चेयरमैन मनीष निगम ने कहा कि इस श्रेणी की इंडस्ट्री अपने भवन में मामूली बदलाव भी नहीं कर सकती। किसी भी निर्माण के लिए पड़ोसी की सहमति जरूरी होती है और निर्माण शुरू होने पर दोनों इकाइयों का कामकाज प्रभावित होता है।व्यापारी एकता मंच के अध्यक्ष योगेश कपूर ने सुझाव दिया कि इस मुद्दे को चीफ आर्किटेक्ट के समक्ष रखा जाए, ताकि व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके।
चंडीगढ़ बर्तन एंड क्राकरी एसोसिएशन के चेयरमैन नरेश गर्ग ने कहा कि ऐसे अधिकांश प्लॉट 40 वर्ष से अधिक पुराने हैं। इन्हें तोड़कर दोबारा निर्माण करना संभव नहीं है। इसलिए प्रशासन को इस श्रेणी के प्लॉटों के लिए एफएआर संबंधी नियमों में अलग संशोधन करना चाहिए, ताकि उद्यमियों के हित सुरक्षित रहते हुए उन्हें अतिरिक्त निर्माण का लाभ मिल सके।
चंडीगढ़ फर्नीचर एसोसिएशन के चेयरमैन नरेश कुमार ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। दोनों प्लॉट मालिकों के लिए एक साथ निर्माण कराना संभव नहीं, क्योंकि कोई भी अपना कारोबार बंद नहीं कर सकता। ऐसे में प्रशासन को उद्योगों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर नीति में बदलाव करना चाहिए।