मार्च 2015 में हरियाणा रोडवेज की वॉल्वो बस के ड्राइवर की लापरवाही से हुए सड़क हादसे में इंजीनियर की मौत हो गई थी। इसी मामले में मोटर एक्सीडेंटल क्लेम ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) के पीठासीन अधिकारी एसके अग्रवाल ने मृतक के परिवार के लिए 1 करोड़ 45 रुपये बतौर मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
मुआवजा राशि देने के लिए वॉल्वो बस के ड्राइवर वी आनंद, हरियाणा रोडवेज के जनरल मैनेजर और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी चंडीगढ़ को आदेश हुए हैं। मोहाली फेज-7 निवासी राजीव गर्ग टैफे मोटर्स एंड ट्रैक्टर लिमिटेड में बतौर इंजीनियर कार्यरत थे और हादसे वाले दिन परिवार के साथ दिल्ली से मोहाली लौट रहे थे। उनकी पत्नी की ओर से यह मुआवजा क्लेम याचिका दायर की गई थी। उनके अनुसार उनके पति की महीने की सैलरी 3 लाख रुपये थी।
याचिकाकर्ता अल्का गर्ग की ओर से कहा गया था कि वह पति राजीव गर्ग के साथ 16 मार्च 2015 को दिल्ली से मोहाली लौट रहे थे। रास्ते में करीब 2:30 बजे जब वह पट्टी कल्याणा गांव, समालखा जिला पानीपत जीटी रोड पर पहुंचे तो राजीव गर्ग ने कार को कच्चे रास्ते पर उतार दिया। यहां वह पानी की बोतल लेने रुके थे। इसी बीच हरियाणा रोडवेज की वॉल्वो बस तेज स्पीड से पीछे से आई और राजीव गर्ग को टक्कर मार दी।
इससे राजीव गंभीर जख्मी हो गए। उन्हें फौरन समालखा के सीएचसी ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस संबंध में ड्राइवर के खिलाफ संबंधित धाराओं में समालखा थाने में केस दर्ज कराया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से क्लेम याचिका में पति की मौत पर दो करोड़ रुपये के मुआवजे का क्लेम किया गया था।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एमएसीटी के पीठासीन अधिकारी ने 1 करोड़ 45 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। मुआवजा राशि में से मृतक की पत्नी और याचिकाकर्ता अल्का गर्ग को 60,95,830 रुपये, उनके बेटे राहुल गर्ग और रजत गर्ग को 30-30 लाख और मृतक की मां संतोष रानी को 25 लाख रुपये देने के आदेश दिए हैं।