फर्नीचर मार्केट की सैटेलाइट से ली गई तस्वीर (अगस्त 2007 और मई 2022)।
- फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ की सबसे बड़ी फर्नीचर मार्केट में मिलीभगत से अतिक्रमण का खेल चल रहा है। बाहर से दुकानें भले ही समान दिखाई दे रही हैं, लेकिन दुकानों के पीछे से इन्हें बढ़ाया जा रहा है। सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें भी इस अतिक्रमण की गवाही दे रही हैं।
यूटी प्रशासन पिछले कई दिनों से शहर की कॉलोनियों को तोड़ रहा है। इसके लिए कहा जा रहा है कि ये सभी अवैध हैं और यहां दिन प्रतिदिन अतिक्रमण बढ़ रहा है। हालांकि सिर्फ कालोनियां ही नहीं, शहर की विभिन्न मार्केटों में अतिक्रमण जोरों पर है, लेकिन प्रशासन के अधिकारियों की नजर वहां तक नहीं पहुंच पा रही है। फर्नीचर मार्केट पिछले 15 साल में पूरी तरह से बदल गई है। यहां मौजूद दुकानों की संख्या तीन गुना हो गई है।
2007 में यहां कुछ ही दुकानें थीं। सैटेलाइट तस्वीरों में भी इसे देखा जा सकता है। जानकारों का कहना है कि मार्केट धीरे-धीरे फैल रही है। वर्ष 2012 के बाद सबसे ज्यादा अतिक्रमण हुआ है जो अभी तक जारी है। फ्रंट साइड से दुकानों में ज्यादा बदलाव भले न दिखाई देता हो, लेकिन दुकानों के पीछे से लगातार अतिक्रमण किया जा रहा है। जो दुकानें कभी 20*30 की थी, आज 20*150 व उससे ज्यादा की हो गई हैं। सेक्टर-53 और 54 दोनों तरफ से अतिक्रमण का खेल चल रहा है। ये सब मिलीभगत से चल रहा है। सरकारी जमीन पर लगातार कब्जा हो रहा है लेकिन अधिकारी व कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं।
6 अप्रैल को धनास में शुरू की थी कार्रवाई, नेताओं के विरोध के आगे झुके
डीसी विनय प्रताप सिंह के आदेश पर 6 अप्रैल को अतिक्रमण हटाओ दस्ते ने धनास की अवैध मार्बल मार्केट पर कार्रवाई करने की कोशिश की लेकिन भाजपा नेताओं के दबाव के आगे एस्टेट ऑफिस को झुकना पड़ा। बताया गया कि धनास में यह अवैध मार्बल मार्केट कई एकड़ की जमीन पर फैली हुई है। एग्रीकल्चर लैंड पर बिना सीएलयू और कनवर्जन कराए यहां पर मार्बल और फर्नीचर बेचने के लिए बड़े-बड़े शोरूम और दुकानें खोल दी गई हैं। सूत्रों का कहना है कि अभी भी यहां अवैध निर्माण हो रहे हैं।