हरियाणा की पूर्व हुड्डा सरकार की नियमितीकरण नीतियों को हाईकोर्ट के रद्द करने से प्रभावित कर्मचारियों ने अपनी नौकरी बचाने के लिए आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। अध्यादेश के जरिये नौकरी बचाने की मांग को लेकर प्रभावित कर्मचारी 22 जुलाई को चंडीगढ़ स्थित सीएम की ओर कूच करेंगे। बावजूद, सरकार ने नौकरी बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आंदोलन की अगली कड़ी में कर्मचारी संसद कूच करेंगे और प्रधानमंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को ज्ञापन दिया जाएगा।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के नेतृत्व में आयोजित कूच में सचिवालय, निदेशालय व विभिन्न विभागों, बोर्डों, विश्वविद्यालय, निगमों में कार्यरत सभी 4654 प्रभावित कर्मचारी शामिल होंगे। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने चंडीगढ़ व संसद कूच का पुरजोर समर्थन करते हुए इसमें शामिल होने का निर्णय लिया है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने बताया कि 31 मई को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 में अधिसूचित नियमितीकरण की तीनों नीतियों को रद्द कर खाली पड़े सभी पदों को 6 महीने में भरने और विभिन्न विभागों में लगे सभी कच्चे कर्मचारियों को नौकरी से निकलने के आदेश दिए थे।
इससे 4654 पक्का हुए कर्मचारी वापस कच्चे हो गए और लाखों कर्मचारी नौकरी से बाहर हो जाएंगे। संघ लगातार अध्यादेश लाकर हाईकोर्ट के निर्णय के क्रियान्वयन पर रोक लगाने व विधानसभा में बिल पारित कर कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग कर रहा है। लांबा ने कहा कि एजी हरियाणा व एलआर की विरोधाभासी राय भी दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार ने अब तक केवल एक कमेटी के गठन के अलावा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है, इससे कर्मचारियों की बेचैनी बढ़ती जा रही है।