बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ सोमवार आधी रात से बिजलीकर्मी 72 घंटे की हड़ताल पर चले गए। इससे पूरे शहर की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। ज्यादातर इलाकों में आधी रात से ही बिजली चली गई और दिनभर नहीं आई। प्रशासन और बिजली विभाग की नाकामी से सभी व्यवस्थाएं धरी रह गईं, जिससे हाहाकार मच गया।
दिनभर लोग बिजली और पानी को तरस गए। शाम को प्रशासन ने बिजली विभाग के कर्मचारियों के लिए पूर्वी पंजाब एस्मा (आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून) 1968 लागू कर दिया। इसके तहत छह माह तक बिजली विभाग के कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकेंगे। शहर के कई इलाकों में सोमवार रात 11 बजे के बाद ही बिजली चली गई और मंगलवार तक नहीं आई।
पूरे दिन लोग बिजली विभाग के हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल करते रहे। लोगों की शिकायत रही कि न तो नंबर मिला और अगर नंबर मिला भी तो किसी ने उठाया नहीं। लोग पूरे दिन परेशान हुए लेकिन विभाग की तरफ से लोगों को कोई जवाब नहीं मिला कि बिजली कब आएगी। पूरे दिन बिजली नहीं आने की वजह से बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं भी प्रभावित हुईं।
इन दिनों यूनिवर्सिटी व कॉलेजों की परीक्षाएं चल रही हैं। बिजली जाने की वजह से परीक्षाएं भी प्रभावित हुईं। वर्क फ्रॉम होम कर रहे कर्मचारी भी दिन भर परेशान रहे। वहीं, पेयजल आपूर्ति भी ठप रही। दिनभर पानी न आने से समस्या और बढ़ गई। लोग दिन भर बिजली विभाग के कर्मचारियों और प्रशासन के अधिकारियों से मदद मांगते रहे लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। लोग भड़क कर शिकायत केंद्र न पहुंच जाएं, इस वजह से 13 केंद्रों पर पूरे दिन पुलिस तैनात रही।
बिजली विभाग का हो चुका है निजीकरण, इसी के खिलाफ है हड़ताल
बिजलीकर्मियों की ये हड़ताल केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ के बिजली विभाग के निजीकरण की फाइल को क्लीयर कर बिजली का काम निजी कंपनी एमीनेंट को देने के खिलाफ है। यूनियन का आरोप है कि प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर बिजली विभाग का निजीकरण किया है। कर्मचारी इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इस वजह से वो 72 घंटे की हड़ताल पर हैं। मंगलवार को विभाग का एक भी कर्मचारी दफ्तर नहीं पहुंचा। यही वजह है कि जहां कहीं भी बिजली का फाल्ट आया, उसे ठीक करने के लिए कोई नहीं पहुंचा और फिर लोगों को अंधेरे में रहना पड़ा। प्रशासन को पता था कि कर्मचारी हड़ताल पर जा रहे हैं, लेकिन विभाग के पास कोई बैकअप योजना नहीं है, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ा।
पंजाब-हरियाणा से मांगी मदद लेकिन नहीं मिली
बिजली संकट से उबरने के लिए प्रशासन ने पंजाब और हरियाणा से मदद मांगी। प्रशासन की तरफ से दोनों राज्यों को पत्र लिखा गया और प्रशिक्षित कर्मचारियों की मांग की गई, जो फॉल्ट की समस्या को दूर कर सकें। पंजाब ने मदद करने में असमर्थता जाहिर कर दी, जबकि हरियाणा की तरफ से अभी तक प्रशासन को कोई जवाब नहीं मिला है। दूसरी तरफ, मेयर सरबजीत कौर ने सुबह एक ट्वीट कर कह दिया कि 400 कर्मचारी पंजाब-हरियाणा से बुलाए गए हैं। शाम तक कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा तो लोगों ने मेयर को सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल किया।