पंजाब में बिजली संकट लगातार गहराता ही जा रहा है। शनिवार को पानी का स्तर गिरने से भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड के तीनों डैमों में बिजली जनरेशन काफी कम रह गया है।
इससे पंजाब के पास बिजली उपलब्धता और कम हो गई है। वहीं प्राइवेट थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट शनिवार को भी बना रहा, जिससे तलवंडी साबो प्लांट बंद पड़ा रहा।
वहीं राजपुरा प्लांट अपनी क्षमता से आधी से भी कम बिजली पैदा कर रहा है। जिससे शनिवार को गांवों में 10 घंटे और शहरों में पांच से छह घंटे के कट लगे। किसानों को भी मुश्किल से पांच घंटे ही बिजली मिली।
लगातार गिर रहा है पानी का स्तर
भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड के मुताबिक भाखड़ा डैम में शनिवार को पानी का स्तर पिछले साल के 1631 फुट के मुकाबले 1615 फुट रह गया, वहीं पौंग डैम में पिछले साल के 1341 फुट के मुकाबले 1314 फुट पानी रह गया है।
डैहर डैम में भी पानी का स्तर नीचे गिर गया है। इसका सीधा असर बिजली जनरेशन पर पड़ा है। जहां पिछले साल आज के दिन पंजाब को बीबीएमबी से 211 लाख यूनिट बिजली मिली थी, वहीं शनिवार को केवल 170 लाख यूनिट बिजली मिली। यह पिछले साल के मुकाबले 41 लाख यूनिट कम रही।
बंद पडे़ हैं थर्मल प्लांट, कोयले का संकट भी
लहरां मोहब्बत का बंद पड़ा एक यूनिट अभी भी चालू नहीं हो सका है। इसे ठीक करने में लगे चीफ इंजीनियर के मुताबिक फाल्ट काफी बड़ा है, जिसे 25 जुलाई तक ही ठीक किया जा सकेगा।
साथ ही प्राइवेट थर्मल प्लांटों में भी अभी तक कोयले का संकट बना है। इससे तलवंडी साबो का 660 मेगावाट का यूनिट चल नहीं सका है। जबकि राजपुरा प्लांट के 1400 मेगावाट के दोनों यूनिटों से केवल 500 मेगावाट ही बिजली जनरेट की जा रही है।
हालांकि शनिवार को पावरकॉम के चेयरमैन इंजीनियर केडी चौधरी ने कहा है कि जल्द ही कोयले के संकट को दूर कर लिया जाएगा।
उन्होंने माना कि प्राइवेट प्लांटों के कारण ज्यादा दिक्कत हो रही है वरना पंजाब के पास बिजली पर्याप्त मात्रा में होती। शनिवार को पंजाब में बिजली की डिमांड 11 हजार मेगावाट रही, इसके मुकाबले में उपलब्धता 9000 मेगावाट रही। पावरकॉम के पास 2000 मेगावाट बिजली की उपलब्धता कम रही।