खेल से बुजुर्ग खुद को रख रहे फिट।
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चंडीगढ़ के वरिष्ठ नागरिकों के लिए उम्र सिर्फ एक अंक है। सेवानिवृत्ति के बाद भी लोग अपने आप को फिट रखने के लिए बैडमिंटन खेलते हैं। युवाओं के लिए बढ़ती उम्र में मिसाल बने इन वरिष्ठ नागरिकों ने तो जैसे उम्र को थाम ही लिया है। वे प्रतिदिन बिना किसी रुकावट के बैडमिंटन खेलते हैं। कोई भी मौसम हो, अपने जज्बे को कम नहीं होने देते हैं। वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि जो शौक नौकरी के समय सीने में दबा रह गया, उसे पूरा करने के लिए आज समय ही समय है। बस यह अपने प्रयासों पर निर्भर करता है कि उसके लिए कितनी मेहनत कर रहे हैं।
बैंक में रखा हिसाब किताब, अब जीवन को कर रहे गुलजार
विपिन शर्मा (62) पंजाब नेशनल बैंक से बतौर एजीएम सेवामुक्त हो चुके हैं। वह मास्टर्स नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप की तैयारियों में जुटे हुए हैं। सेवामुक्ति से पहले ही उन्होंने योजना बना ली थी कि मुझे खुद को फिट रखना है। इसके लिए बैडमिंटन को चुना। रोज बैडमिंटन सेंटर पर अभ्यास करने जाते हैं। इससे मेरी फिटनेस बनी रहती
है।
इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं मिला, जज्बा बना रहा
कर्नल राजीव मेहता (59) 2020 में सेना से रिटायर हुए। वह पिछले कई वर्षों से बैडमिंटन खेल रहे हैं। कई बार उनकी पोस्टिंग लेह-लद्दाख और नार्थ ईस्ट में हुई। वहां बैडमिंटन का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं मिला, लेकिन हौसला नहीं टूटा। जहां भी नई पोस्टिंग हुई, वहां पर बैडमिंटन खेलते रहे। अब भी रोजाना अभ्यास करते हैं। इसी महीने स्पेन में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारतीय टीम का नेतृत्व करना है।
वन विभाग के बाद अब बैडमिंटन बड़ा लक्ष्य
अनिल सोंधी (69) इंडियन फॉरेस्ट सर्विस के पद से सेवामुक्त हुए हैं। उन्होंने 50 वर्ष की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू किया। उन्होंने बताया कि अगर आप स्वस्थ हैं तो कोई बीमारी आपके पास नहीं आ सकती। इसी फॉर्मूले पर अपना जीवन जीता हूं। उन्होंने दो साल पहले पोलैंड में आयोजित खेलों में भारतीय टीम का नेतृत्व किया था।
सेवामुक्ति के बाद अब चैंपियनशिप की तैयारी
गुरप्रीत सिंह सिद्धू (61) यूटी शिक्षा विभाग में स्पोर्ट्स ऑर्गेनाइजर के पद से सेवामुक्त हुए हैं, पर बैंडमिंटन को लेकर उनका जज्बा बरकरार है। काम के दौरान ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज टूर्नामेंट में परचम लहराया तो अब रोजाना शाम को 6 से 8 बजे तक सेक्टर-42 के स्पोर्टस कांप्लेक्स के बैडमिंटन कोर्ट पर पसीना बहाते हैं।