शिअद (टकसाली) के अध्यक्ष रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा और सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा के बीच पंथक नेता बनने की होड़ लग गई है। कुछ दिन पहले मंत्री सेवा सिंह सेखवां, रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा और ढींढसा के बीच एक बैठक हुई है। इस बैठक में ब्रह्मपुरा ने ढींढसा से नई पार्टी के गठन के बारे में बात की थी और ढींढसा ने ब्रह्मपुरा को शिअद (ट) भंग करने के लिए कहा।
वहीं ब्रह्मपुरा ने ढींढसा को शिअद (ट) का अध्यक्ष पद संभालने का आग्रह किया। इसे ढींढसा ने स्वीकार करने से इंकार कर दिया। वहीं ब्रह्मपुरा ने भी स्पष्ट कर दिया कि शिअद (ट) को भंग करने का सवाल ही पैदा नहीं होता। पार्टी का गठन श्री अकाल तख्त साहिब में अरदास के बाद किया गया है। इसको तोड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
ब्रह्मपुरा ने कहा कि ढींढसा दिल्ली दरबार के इशारे पर बोल रहे हैं। उनकी मित्रता दिल्ली दरबार के सत्ताधारियों के साथ है। आगामी विधानसभा चुनाव में ढींढसा की नजर हिंदू वोट बैंक पर है। इसलिए उन्हें शिअद (टकसाली) नाम पर आपत्ति है। ढींढसा यदि बादल परिवार व कांग्रेस को पंजाब की सत्ता से बहार निकालना चाहते है तो वह एकजुट होकर काम करे।