10 जून तक शिक्षा प्रोवाइडरों को रेगुलर नहीं किया तो दिया संघर्ष का अल्टीमेटम
मुख्यमंत्री और वित्तमंत्री के हलके में जाकर रोष रैलिया निकाले की कर रखी है तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सूबे के शिक्षा प्रोवाइडरों ने सरकार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बजा दिया है। उन्होंने सरकार से अब आर पार की जंग लड़ने का फैसला लिया है। सरकार को चेतावनी दी है कि अगर 10 जून तक उन्हें रेगुलर करने संबंधी आदेश जारी नहीं किए तो वह संघर्ष की राह पर आ जाएंगे। 13 जून को संगरूर में मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के हलके में जाकर रोष रैली करेंगे। साथ ही लोगों के आगे सरकार की पोल खोलेंगे।
राज्य के विभिन्न स्कूलों में 8736 शिक्षा प्रोवाइडर सालों से काम कर रहे हैं। लेकिन उन्हें स्कूलों में तैनात अन्य शिक्षकों से कम वेतन मिलता है। जबकि शिक्षा प्रोवाइडर पक्के शिक्षकों की तरह की शैक्षणिक योग्यता रखते हैं। इस मामले को लेकर वह कई वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। यूनियन नेताओं का कहना है कि इससे पहले अकाली-भाजपा और कांग्रेस सरकार के समय में भी उन्होंने संघर्ष किया था। उस समय शिक्षा विभाग ने शिक्षा प्राेवाइडरों को रेगुलर करने के अन्य राज्यों के मॉडल की स्टडी की गई ली। लेकिन कोई फायदा उन्हें नहीं हुआ था। इसी बीच राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार सत्ता में आई थी। सरकार ने सत्ता में आते ही दावा किया था कि शिक्षकों पानी की टंकियों में जाकर संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। बल्कि उनकी मांगों को पहल के आधार पर हल किया जाएगा। इसके बाद सरकार ने कच्चे मुलाजिमों को पक्के करने की दिशा में कदम भी बढ़ाया था। लेकिन अभी तक उन्हें रैगुलर नहीं किया गया है। इस वजह से उन्हें संघर्ष की राह पर आना पड़ा है। यूनियन के सूबा प्रधान मनप्रीत सिंह मोगा ने बताया कि अब मुलाजिम पीछे हटने वाले नहीं हैं।