चंडीगढ़। नया शिक्षण सत्र शुरू होने के बाद अभिभावक सेक्टर-22 और सेक्टर-19 में दुकानों पर किताबें लेने पहुंच रहे हैं। अभिभावकों के साथ स्कूल और दुकानदारों की तरफ से लूट जारी है। हैरानी की बात है कि शिकायतों के बाद भी शिक्षा विभाग कोई कार्रवाई करने के लिए तैयार नहीं है। इस लूट को शिक्षा विभाग की पूरी छूट मिली है।
दुकानदार अभिभावकों को किताबों के साथ स्टेशनरी लेने के लिए बाध्य कर रहे हैं। 20 रुपये वाली कॉपी 45 रुपये में बेची जा रही है। बीते दिन कुछ अभिभावक सेक्टर-37 के एक निजी स्कूल के लिए सेक्टर 22 के एक नामी बुक स्टोर पर किताब और कॉपियां लेने पहुंचे। जब उन्होंने घर जाकर कॉपियां चेक कीं, तो पता चला कि कॉपियों के ऊपर जो रेट लिखा था, वह केवल स्टीकर था। जब उस स्टीकर को हटाया गया तो रेट कुछ और था। अभिभावकों ने कहा कि वह मार्च महीने से इस लूट का शिकार हो रहे हैं। विभाग केवल तमाशा देख रहा है। पहली से लेकर 8वीं कक्षा तक 3 से 9 हजार तक की किताबें बिक रही हैं, जबकि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का निर्देश है कि स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ाई जाएं।
128 की जगह केवल 64 पेज ही कॉपी में थे
नाम न बताने की शर्त पर अभिभावक ने कहा कि जब उन्होंने कॉपियां खरीदीं, तो एक कॉपी पर 45 रुपये और 128 पेज का स्टिकर लगाया गया था। जब उस स्टीकर को फाड़ कर हटाया गया है, तो नीचे 20 रुपये रेट लिखा हुआ था। इसके अलावा जब कॉपी के पेज गिने गए तो 128 की जगह 64 पेज ही पाए गए। अभिभावकों का कहना है कि इस प्रकार से उन्हें लूट जा रहा है। आखिर कब तक शिक्षा विभाग इस पर चुप्पी साधे रहेगा।
एनसीईआरटी के नए एडिशन की किताब की जगह मंगवा रहे पुरानी किताब
वहीं, सेक्टर 44 के एक स्कूल की ओर से जो किताबें मंगवाई गई है, उसमें नए एडिशन में गणित प्रशासन की बुक एनसीईआरटी की ओर से भेजी गई है लेकिन स्कूल की ओर से 2 साल पहले वाली किताब की मांग की जा रही है। अभिभावकों ने जब सवाल उठाया कि तो स्कूल ने अभिभावकों को मैसेज भेज दिया कि गणित प्रकाशन की बुक खरीद लें, वह पुरानी किताब के चैप्टर की पीडीएफ बनाकर बच्चों को दे देंगे। अभिभावकों ने सवाल उठाया कि स्कूल एनसीईआरटी की ओर से भेजी गई किताब को क्यों लागू नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि यदि किताब में से पढ़ाया नहीं जाएगा तो अभिभावक उसे क्यों खरीदें। इस तरह अभिभावकों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा विभाग पर सवाल खड़ा किया गया है कि अधिकारी किसी काम के नहीं।