चंडीगढ़। बदलती जीवनशैली और अनियमित खानपान के कारण बच्चे और बड़े दोनों ही तेजी से मोटापे और गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। खासकर जंक फूड का अत्यधिक सेवन न सिर्फ मोटापा बढ़ा रहा है, बल्कि यह शुगर, हार्ट प्रॉब्लम और लिवर को भी प्रभावित कर रहा है। यह कहना है न्यूट्रिशियन काउंसलर डाॅ. गीतांजलि गुप्ता का।
राष्ट्रीय जंक फूड दिवस के मौके पर उन्होंने बताया कि आजकल बच्चे और वयस्क दोनों ही चिप्स, बर्गर, मीठे पेय और पैकेज्ड स्नैक्स जैसे फास्ट फूड पर अधिक निर्भर हो गए हैं। वहीं, शारीरिक गतिविधियों में भी भारी गिरावट आई है। दिनभर ऑफिस में बैठे रहना और असंतुलित आहार जैसे जंक फूड के बढ़ते सेवन से फैटी लिवर, गैस, कब्ज, पेट में भारीपन, पेट दर्द, खाना पचने में तकलीफ और मल से खून आने जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। डॉ. गीतांजलि ने बताया कि गलत खानपान और जीवनशैली कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने के साथ-साथ लिवर के चारों ओर फैट जमा कर देती है, जिससे लिवर पर नकारात्मक असर पड़ता है। इससे हेपेटाइटिस का खतरा बढ़ जाता है। हेपेटाइटिस बी और सी सबसे घातक होते हैं, जो लिवर को पूरी तरह से खराब कर सकते हैं। मोटापा भी लिवर को प्रभावित करता है।
स्मार्ट स्वैप्स से बदलें आदतें
डॉ. गीतांजलि ने बताया कि कई स्कूल और सामाजिक संगठन ''''स्मार्ट स्वैप्स'''' के विचार को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसके तहत जंक फूड के स्थान पर पौष्टिक विकल्पों को अपनाने की सलाह दी जा रही है। जैसे चिप्स की जगह भुने हुए मखाने, मिठाई और चॉकलेट की जगह ताजे फल, कोल्ड ड्रिंक की जगह नींबू पानी या छाछ और बर्गर की जगह साबुत अनाज के सैंडविच खाए जा सकते हैं।
रात को 7 बजे के बाद भोजन न करें
स्वस्थ जीवनशैली के लिए डॉ. गीतांजलि ने रोजाना व्यायाम करने और समय पर भोजन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि रात को 7 बजे के बाद भोजन करने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है और शरीर में वसा जमने लगती है। कहा कि स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि खानपान में संतुलन लाया जाए और जंक फूड की जगह पौष्टिक आहार को प्राथमिकता दी जाए।