रमन सलारिया ने बताया कि आम दुकानों पर यह फल नहीं मिलता। बड़े स्टोर पर ही यह उपलब्ध है। प्रति फल की कीमत 400 से 500 रुपये है। जिसके चलते यह आम आदमी की पहुंच से बाहर है। वह पठानकोट में लोगों को 200 से 300 रुपये में बेच रहे हैं। इसकी अच्छी पैदावार होने पर और कम दाम में इसे बेचा जाएगा।
थोक में फ्रूट नहीं बेचेंगे, खुदरा बेचने के लिए लगाएंगे दुकान
सलारिया बताते हैं, जब वह गुजरात से इसका प्रशिक्षण लेकर लौटे और अपने खेत में इसे लगाया तो लोग मजाक उड़ाने लगे और फब्तियां कसने लगे। पहली बार फल देरी से आता है, इसलिए लोगों ने मजाक बनाया। अब वही लोग युवाओं को उदाहरण देकर कुछ अलग करने की सलाह देते हैं।
रमन का कहना है कि वह थोक में फल नहीं बेचेंगे और खुद खुदरा दुकान लगाएंगे। वहीं से इसकी बिक्री करेंगे। पूछने पर बताया कि विदेशी फल होने की बात कहकर बिचौलिए इसका रेट दोगुना कर देते हैं, लेकिन वह अपने शहर और जिले में इसे सस्ते दाम में लोगों तक पहुंचाएंगे।
उत्तरी अमेरिका से शुरू हुई ‘ड्रैगन फ्रूट’ की पैदावार
रमन सलारिया ने बताया कि ‘ड्रैगन फ्रूट’ की सबसे पहले पैदावार उत्तरी अमेरिका से शुरू हुई। उसके बाद थाईलैंड, फिलीपींस, ताइवान, इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर में इसकी बड़े स्तर पर बागवानी हो रही है। पंजाब समेत कई राज्यों में उत्तरी अमेरिका और थाईलैंड से इसको मंगवाया जा रहा है। देश में गुजरात और महाराष्ट्र के किसान इसकी पैदावार कर रहे हैं। इसके बावजूद इसे विदेश से आयात करना पड़ रहा है।