भीषण गर्मी और शुष्क मौसम के बीच आसमान में धूल की चादर ने लोगों का सांस लेना भी दूभर कर दिया है। प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सांस से संबंधी मरीजों का घर से निकलना दूभर हो चुका है। मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि राजस्थान में धूल का गुबार तेज हवाओं के कारण काफी ऊपर पहुंच गया। इस समय में हवाओं का रुख पश्चिम से पूर्व है, जिससे धूल की चादर हरियाणा के रास्ते चंडीगढ़ पहुंच गई है। यही नहीं धूल के कारण रात में जमीन की सतह की गर्मी को वायुमंडल में वापस जाने से रोक रही है। इससे रात का तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया जा रहा है।
वीरवार को अधिकतम तापमान 39.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य के बराबर था, जबकि न्यूनतम तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया, जो सामान्य से आठ डिग्री अधिक था। मौसम विभाग की ओर से बताया गया है कि अगले 24 घंटे तक ऐसा ही मौसम रहने की संभावना है। 15 जून की रात या 16 जून की सुबह मौसम में बदलाव आएगा और धूल की चादर हटेगी। प्राइवेट मौसम एजेंसी स्काइमेट के अनुसार ये हवाएं पाकिस्तान और राजस्थान से होकर आ रही हैं, जहां से पहले से ही शुष्क मौसम के कारण धूल के कण और रेत हवा में घुलकर बादल की तरफ छाए हुए हैं।
वहां से हवाएं चलीं तो धूल की चादर दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा से होकर चंडीगढ़ को पारकर पंजाब तक पहुंच गई। चंडीगढ़ मौसम विभाग के डायरेक्टर सुरेंद्र पाल ने बताया कि 15 जून शाम से मौसम में बदलाव आने लगेगा। तेज हवाएं चलने और बारिश से ही धूल की चादर हटने की संभावना है।
खतरनाक स्तर पर पहुंचा प्रदूषण
धूल की चादर आने से प्रदूषण भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। प्रदूषण विभाग के मुताबिक पेक सेक्टर 12 में एयरक्वालिटी इंडेक्स 361 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के मानकों के अनुसार इसे गंभीर स्थिति में मानी जाती है। इसके तहत पीएम-10 का स्तर काफी ज्यादा है। इंडस्ट्रियल एरिया में एयरक्वालिटी इंडेक्स 278 दर्ज किया गया। यहां भी गंभीर स्थिति बनी हुई है। प्रदूषण विभाग की ओर से बताया गया कि धूल की चादर बनने से प्रदूषण के कण नीचे ही रह रहे हैं। इस वजह से पीएम-10 का स्तर बढ़ा हुआ रिकार्ड किया गया है।
सांस के रोगी घर से न निकले
पीएम-10 का स्तर बढ़ने से सांस के रोगियों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। पीजीआई के पल्मोनरी डिपार्टमेंट के पूर्व एचओडी प्रो. डी बेहरा ने बताया कि पीएम-10 का स्तर बढ़ने से सांस के रोगियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खासतौर एलर्जी, लंग्स फाइब्रोसिस, अस्थमा और ब्रोंक्राइटिस के मरीजों को इस मौसम मेें नहीं निकलना चाहिए। वे घर पर ही रहें। यदि उन्हें घर पर दिक्कत आ रही है तो अपने डाक्टर से संपर्क करें। यदि घर से जरूरी निकलना है तो मास्क लगाकर निकलें। वरना उनके लिए सास लेना दूभर हो जाएगा।
अगले 24 घंटे में मौसम बदलने के आसार हैं। इससे धूल की चादर हटने की संभावना है। 15 जून की रात में हवाओं के रुख में बदलाव आएगा। इससे धूल की चादर हटेगी। उसके बाद बारिश की संभावना है।
- सुरेंद्र पाल, डायरेक्टर मौसम विभाग