चंडीगढ़ के मलोया थाने में महज दो महीने पहले तैनात हुई डीएसपी पलक गोयल ने अपनी ड्यूटी के साथ मानवता का परिचय देते हुए जरूरतमंद लोगों तक राशन पहुंचा कर मिशाल पेश किया है। वहीं, दूसरी तरफ उन्होंने बिना छुट्टी लिए दो महीने से अपनी ड्यूटी कर रही हैं। पलक ने बेहतर रणनीति के साथ न सिर्फ कोरोना वायरस संक्रमण को लोगों के बीच फैलने से रोका, बल्कि एरिया में बढ़ते क्राइम ग्राफ पर रोक लगाई।
दानिप्स कैडर की पलक गोयल साल 2019 में चंडीगढ़ पुलिस में बतौर डीएसपी के पद पर तैनात हुईं। पुलिस विभाग के आला अधिकारियों ने डीएसपी पलक पर भरोसा जताते हुए शहर के ऐसे थाने को सौंप दिया, जहां ड्रग सप्लाई, शराब तस्करी और लड़ाई झगड़े का अकसर मुद्दा बना रहता है। शहर में कर्फ्यू लगने से महज कुछ दिन पहले ही ट्रेनिंग के तौर पर डीएसपी पलक गोयल की मलोया थाना प्रभारी के पद पर पोस्टिंग कर दी गई।
इस बीच कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के चलते 23 मार्च की मध्यरात्रि से शहर में कर्फ्यू भी लग गया। मलोया थाने के अंतर्गत डड्डूमाजरा, मलोया कॉलोनी समेत अन्य कॉलोनियों में लोगों को बिना वजह घर के बाहर निकलने से रोक पाना एक मुश्किल काम था, लेकिन उन्होंने अफसरों की गाइडलाइन और अपनी बेहतर रणनीति पर काम शुरू कर दिया। कर्फ्यू के बाद से अब तक एरिया में नियंत्रण बनाए रखने में कामयाबी हासिल की।
जरूरतमंद को बांटा राशन डीएसपी पलक
पंचकूला स्थित सेक्टर 6 में पति दीपांकर गर्ग के साथ रहती हैं। डीएसपी पलक लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी सेवा में भी जुटी हुई हैं। पलक ने मलोया थाने में तैनात पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर डड्डूमाजरा कॉलोनी, मलोया ईडब्ल्यूएस कॉलोनी समेत अन्य आसपास के एरिया में जरूरतमंद लोगों तक राशन और जरूरी सामग्री भी बांटती रही हैं।
बॉर्डर पर किया कड़े पहरे का इंतजाम
मलोया थाना अंतर्गत पंजाब के तीन बॉर्डर लगते हैं। इसमें बलौंगी, तोगा बैरियर और बहलोलपुर शामिल हैं। पंजाब और चंडीगढ़ से आए दिन सैकड़ों गाड़ियां इस बॉर्डर से गुजरती हैं। ऐसे में कोरोना संक्रमण की महामारी के बीच बॉर्डर एरिया पर सुरक्षा के कड़े पहरे का इंतजाम किया गया था।
एरिया में घटा क्राइम का ग्राफ
मलोया थाने में अक्सर देखा जाता रहा है कि लड़ाई झगड़े के साथ-साथ, बच्चों के लापता, नशा-शराब तस्करी समेत अन्य क्राइम लगातार बढ़ते रहते थे, लेकिन कर्फ्यू और लॉकडाउन के बीच इस एरिया में क्राइम का ग्राफ पूरी तरह गिर गया है। इसकी एक वजह मलोया पुलिस की मुस्तैदी भी है।
डीजीपी बेनीवाल भी कर चुके हैं तारीफ
कर्फ्यू के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी प्रवासियों के पलायन को रोकने को लेकर थी। ऐसे में एसएसपी नीलांबरी विजय जगदले की गाडलाइन के बाद डीएसपी पलक ने मोर्चा संभाला और टीम के साथ मिलकर पलायन कर रहे मजदूरों को बॉर्डर पर खाना पीना और उनके रहने के इंतजाम के लिए शेल्टर होम पहुंचाती रहीं। डीजीपी संजय बेनीवाल मलोया थाने में पहुंचकर डीएसपी पलक गोयल समेत थाने में तैनात अन्य पुलिसकर्मियों की सरहना भी की थी।