हरियाणा में नशीली दवाओं के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के आदेशों पर कमर कस ली है। विभाग ने पुलिस की तर्ज पर एसआईटी (स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम) गठित करने का फैसला लिया है। ये टीमें प्रदेश में अचानक छापेमारी करेंगी। विभाग के कमिश्नर डा. साकेत कुमार इसे लेकर पूरी तरह से गंभीर हैं। विभाग ने प्रदेश में ड्रग एक्ट के तहत 400 केस भी पकड़े हैं, जो कोर्ट में विचाराधीन है।
नशीली दवाओं के कारोबार पर विभाग सख्त
दरअसल, हरियाणा यूपी और पंजाब के नशीले नेटवर्क में फंसा हुआ है। यूपी से जहां नशीले कैप्सूल और इंजेक्शन की जबरदस्त सप्लाई होती है। पंजाब से भी नशीली दवाओं का कारोबार चलता है। पंजाब के साथ लगते हरियाणा के विभिन्न जिले इसकी जद में हैं, जबकि यूपी से ये नशीली दवाइयां बसों और रेलों के जरिए तस्करों द्वारा हरियाणा में लाई जा रही हैं। ऐसे कई मामले फूड एंड ड्रग विभाग ने पकड़े भी है। प्रदेश भर में आलम यह है कि ये नशीली दवाएं केमिस्ट शॉप और लोगों के घराें तक अवैध रूप से बिक रही हैं और किशोर से लेकर बुजुर्ग तक हर वर्ग के लोग इसकी जद में है।
नशा छुड़वाने के नाम पर ही चल रहा था धंधा
ड्रग विभाग ने पिछले दिनों सिरसा में एक रेड के दौरान भारी मात्रा में नशीली दवाओं का जखीरा पकड़ा था। यहां व्यक्ति नशा छुड़वाने के नाम पर इन नशीली दवाओं का अवैध कारोबार कर रहा था। घर के कोठड़े से ये दवाएं बरामद हईं। इसी तरह अंबाला के रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर भी नशीली दवाओं समेत नशा तस्कर काबू किए जा चुके हैं, जबकि अन्य जिलों में भी ऐसे मामले पकड़े जा चुके हैं।
पुलिस की तर्ज पर विभाग ने एसआईटी गठित करने का फैसला लिया है। ये एसआईटी प्रदेश भर में नशीली दवाओं की तस्करी और कारोबार पर नजर रखेगी और अपना खुफिया नेटवर्क भी विकसित करेगी, जिसके बाद एसआईटी प्रदेशभर में कई भी छापेमारी करेगी।
- एनके आहूजा, स्टेट ड्रग कंट्रोल, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग