शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में शिक्षक विद्यार्थी नियमित संवाद से ही युवाओं में नशे व अन्य दिक्कतों को दूर किया जा सकता है, क्योंकि संवाद विद्यार्थियों को शिक्षकों के प्रति सहज बनाता है। संवाद से वह चीज आसानी से बाहर आ सकती है, जिसे विद्यार्थी कभी सीधे शेयर नहीं करता है। यह बात सोमवार को अमर उजाला संवाद के 'रोशन राहें' सत्र में पंजाब केंद्रीय यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने कहीं।
उन्होंने बताया कि अपनी यूनिवर्सिटी में करियर गाइडेंस काउंसिलिंग सेल बनाया है। इसके अलावा मनोवैज्ञानिक सेल भी स्थापित किया गया है। जहां पर विद्यार्थियों को काउंसिलिंग कर दिक्कतों को दूर किया जा सकता है। वाइस चांसलर ने बताया कि नई शिक्षा नीति बेरोजगारी को कम करने में भी अहम भूमिका निभाएगी, क्योंकि आजकल युवा जिस चीज को सीखना चाहते है, उस चीज को उन्हें हमें सिखाना होगा।
हमें एजुकेशन डेमोक्रेसी युवाओं को देनी होगी, नई शिक्षा नीति से यह संभव है। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति में सिखाने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने नई शिक्षा नीति की बारीकियों पर अपनी बात रखी। साथ ही अपनी यूनिवर्सिटी के तुजुर्बे को साझा किया। जब उनसे 32 सालों के शैक्षणिक अनुभव, पूर्वोतर, मध्य प्रदेश और पंजाब की शिक्षा के बारे में सवाल किया तो उन्होंने बताया कि पूर्वोतर में वह काफी समय रहे है।
वहां पर जब उन्होंने टेक्नोलॉजी के साथ शिक्षा को जोड़ा तो उसे अच्छे नतीजे आए, युवा शिक्षा से जुड़ने लगे। मध्य भारत में शिक्षा के क्षेत्र में शुरू से आगे रहा है। 1946 में शिक्षण संस्थान स्थापित हो गए थे। जबकि पंजाब में शिक्षण संस्थानों में कास्मो कल्चर रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में 25 प्रांतों के शिक्षक, 29 के विद्यार्थी और 12 प्रांतों के कर्मचारी है लेकिन एक कष्ट की बात यह है कि कुल 2500 विद्यार्थियों में से पंजाब में केवल 148 है। बठिंडा क्षेत्र में कराए जा रहे अपने कामों पर भी प्रकाश डाला। इसके अलावा युवाओं के कौशल विकास पर भी उन्होंने अपनी राय रखी।