46 हजार से अधिक नशीली दवाओं के कैप्सूल और 264 इंजेक्शनों के साथ और दूसरे केस में 175 कैप्सूल के साथ पकड़े गए हल्लोमाजरा निवासी अमरजीत सिंह को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने केस साबित न होने पर बरी कर दिया। अमरजीत सिंह के खिलाफ सेक्टर-31 थाना पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट 22 के तहत दो केस दर्ज किए थे। दोनों ही मामलों में पुलिस केस साबित करने में नाकाम रही।
पहले केस में 18 अक्तूबर 2013 को सेक्टर-31 थाना पुलिस हल्लोमाजरा लाइट प्वाइंट पर नाका लगाकर वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पोल्ट्री फार्म हाउस की ओर से अमरजीत पैदल आता दिखाई दिया। एएसआई रंजीत सिंह टीम के साथ वहां मौजूद थे। पुलिस को देख अमरजीत वहां से वापस मुड़ गया और भागने लगा। इस पर पुलिस कर्मियों ने उसे पकड़ लिया। उसके पास सफेद रंग का प्लास्टिक का बैग था।
इसमें से 75 डिब्बों से 6 हजार से अधिक बैन किए गए नशीले कैप्सूल बरामद हुए। इसके अलावा 11 बॉक्स से 264 इंजेक्शन बरामद हुए। इंजेक्शन हालांकि बैन नहीं थे, लेकिन उन्हें इतनी बड़ी मात्रा में ले जाने का कोई लाइसेंस या दस्तावेज नहीं था। इसके बाद सेक्टर-31 थाना पुलिस ने अमरजीत सिंह के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट-22 के तहत केस दर्ज किया था। वहीं दूसरे मामले में पुलिस को उसके पास से 175 नशीली दवाएं बरामद हुईं थी। इस मामले में भी उस पर एक अन्य केस चल रहा था।
ऐसे गिरा केस
बचाव पक्ष के वकील जीएस सैनी के अनुसार पुलिस ने दोनों केस में अमरजीत को झूठा फंसाया था। दोनों मामलों में उसकी गिरफ्तारी घर से की गई थी। दोनों मामलों में पुलिस जांच अधिकारियों और अन्य कर्मियों के बयान मेल नहीं खा रहे थे। एक मामले में पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी हल्लोमाजरा लाइट प्वाइंट से दिखाई और गिरफ्तारी में दिखाए गए समय से एक घंटे पहले वह थाने में मौजूद था। यह बात थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे में सामने आई है। वह 9 बजे से सवा 10 बजे तक थाने में था, जबकि पुलिस ने दूसरे केस में उसी समय उसकी गिरफ्तारी 10 बजे की हल्लोमाजरा लाइट प्वाइंट से दिखाई है। इसके अलावा पुलिसकर्मियों के बयान में भी बहुत अंतर था।