चंडीगढ़। ऋण वसूली अधिकरण को राहत देते हुए दिल्ली के एक पीठासीन अधिकारी को चंडीगढ़ डीआरटी-2 का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है जिससे शहर के तीनों डीआरटी के पूरी तरह निष्क्रिय होने का संकट टल गया है। यह जानकारी बुधवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दी गई। हाईकोर्ट ने फिलहाल अस्थायी व्यवस्था पर असंतोष जताते हुए नियमित नियुक्ति की तत्काल आवश्यकता बताई है।
अदालत ने संकेत दिया कि छह माह बाद फिर यही स्थिति उत्पन्न हो सकती है। बुधवार को केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सतपाल जैन ने खंडपीठ के समक्ष मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति का आदेश प्रस्तुत किया। आदेश के अनुसार दिल्ली डीआरटी-3 के पीठासीन अधिकारी शिव कुमार-1 को चंडीगढ़ डीआरटी-2 का अतिरिक्त प्रभार 14 फरवरी 2026 से छह माह के लिए या नियमित अधिकारी के पदभार ग्रहण करने तक अथवा अगले आदेश तक जो भी पहले हो सौंपा गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ में एक अधिकारी 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो रहे हैं इसलिए यह अंतरिम व्यवस्था की गई है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि छह महीने बाद फिर दोहराना पड़ेगा और नियमित तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद छिब्बर ने केंद्र के प्रयासों की सराहना करते हुए आगाह किया कि दिल्ली स्थित अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार देने से व्यावहारिक दिक्कतें उत्पन्न हो सकती हैं जिनमें संपूर्ण रिकार्ड को राष्ट्रीय राजधानी स्थानांतरित करने जैसी जटिलताएं शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ के तीनों डीआरटी जो पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ के मामलों की सुनवाई करते हैं में से दो पहले ही पीठासीन अधिकारियों के बिना थे जबकि तीसरा पद भी मार्च में रिक्त होने वाला था। ऐसे में आशंका थी कि पूरा अधिकरण तंत्र ठप हो जाएगा। इसी सप्ताह खंडपीठ ने रिक्त पदों को भरने के लिए केंद्र से उठाए जा रहे कदमों पर सवाल उठाए थे।