दुर्घटनाग्रस्त वाहन के चालक के पास लाइसेंस न होना लापरवाही से गाड़ी चलाने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। चालक पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत लाइसेंस न होने के चलते कार्रवाई तो की जा सकती है लेकिन उसको एक्सीडेंट के मुआवजे से इनकार नहीं किया जा सकता है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का यह अहम फैसला उत्तर प्रदेश रोडवेज निगम की अपील को खारिज करते हुए आया है।
उत्तर प्रदेश रोडवेज की बस की टक्कर से एक युवक की मौत हो गई थी। फरीदाबाद में हुई इस दुर्घटना के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी और मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में मुआवजे के लिए याचिका दाखिल की गई थी। ट्रिब्यूनल ने मृतक के परिजनों को एक लाख चार हजार मुआवजा तय किया था।
इसके खिलाफ यूपी रोडवेज ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती दी थी। यूपी रोडवेज ने एक ओर तो एक्सीडेंट उनकी बस से न होने की बात कही थी तो दूसरी ओर मृतक को बिना लाइसेंस वाहन चलाने और 18 वर्ष से कम होने की बात कहते हुए बराबर का लापरवाह बताया था।
ड्राइवर ने नहीं की झूठे केस में फंसाने की शिकायत
हाईकोर्ट ने अपील को खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी वाहन चालक के पास लाइसेंस नहीं है तो केवल इस आधार पर उसे लापरवाह करार नहीं दिया जा सकता। दूसरा यह कि बस का ड्राइवर इस केस में ट्रायल झेल रहा है और उसने कहीं पर भी झूठे केस में फंसाने की शिकायत नहीं दी है। ऐसे में हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने मुआवजा देने और मृतक को लापरवाह न मानने का जो निर्णय लिया है वह सही है और उसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।