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कार फ्री डे : पूरा नहीं हो सका पीयू को ईको फ्रेंडली बनाने का सपना, कैंपस में खूब दौड़ती हैं कारें

Wed, 22 Sep 2021 11:07 AM IST
Trainee Trainee अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़

सार

कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) कोटे के तहत विश्वविद्यालय को 12 लाख रुपये का फंड मिला था। 400 से अधिक साइकिलें खरीदी गईं थी। 70 विभागों में यह साइकिलें बांटी गई। छात्रावासों को भी 2 से 4 साइकिलें दी गईं। अब फिर से कारों की संख्या बढ़ने लगी हैं और ये साइकिलें जंग खा रही हैं।
 
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब विश्वविद्यालय ने अपने कैंपस को ईको फ्रेंडली बनाने का सपना जरूर देखा, लेकिन यह सफल नहीं हो पाया। इसके तहत खरीदी गई साइकिलें डंप में पड़ी हैं। वहीं, कारें कैंपस में फर्राटे से दौड़ती दिख जाती हैं। लगातार इन कारों के कारण कैंपस में वायु व ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है। हालांकि पीयू का तर्क है कि दो साल से कैंपस कोरोना के कारण बंद चल रहा है। अब छात्र दोबारा आने लगे हैं तो उन्हें फिर से साइकिलें आवंटित की जा रही हैं।

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2016 में पंजाब यूनिवर्सिटी ने योजना बनाई थी कि कैंपस ईको फ्रेंडली हो। इसके लिए कारों का प्रवेश कैंपस में कम कर साइकिलों के चलन पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। टीचर्स से लेकर स्टूडेंट्स तक साइकिलों का प्रयोग करेंगे। पीयू ने इस पर मुहर लगा दी थी, लेकिन यह योजना धरातल पर 2018 में उतरी।
 
कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) कोटे के तहत पीयू को 12 लाख रुपये मिले। कुछ बजट पीयू ने अपने खाते से भी निकाला। इस तरह 400 से अधिक साइकिलें खरीदी गईं। 70 विभागों में यह साइकिलें बांटी गई। छात्रावासों को भी 2 से 4 साइकिलें दी गईं। जैसे ही साइकिलें मिली तो इनका संचालन शुरू हुआ, लेकिन उसके बाद फिर से कैंपस में कारों की संख्या बढ़ने लगी और तीन साल से यह योजना फिर से बंद हो गई। अब ये साइकिलें जंग खा रही हैं।
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3000 से अधिक कारें आती हैं कैंपस में
कोरोना के चलते कैंपस पूरी तरह नहीं खुला, लेकिन यहां लगभग 3000 से अधिक कारें रोजाना आ रही हैं। पीयू के गेट नंबर एक से लेकर तीन, गांधीयन विभाग के सामने से कारें फर्राटा भरती दिख जाती हैं। बाहरी कारों की आवाजाही बढ़ रही है। बताते हैं कि दो साल पहले छात्रों ने खुद कारों के प्रवेश को वर्जित करने के लिए अपने मतों का प्रयोग किया था। छात्र संघ चुनाव में मुद्दा बना था, पर इसका असर नहीं दिख रहा। शिक्षकों ने भी साइकिलें चलाने पर जोर देने को कहा था, लेकिन गिनती के शिक्षक ही साइकिलें चलाते हैं।

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अफसरों की सुनिए

कार छोड़ साइकिल अपनाएं
लोगों को कार छोड़कर साइकिल की सवारी शुरू करनी चाहिए। मैं आह्वान करूंगा कि लोग सार्वजनिक परिवहन और साइकिल प्रयोग करें। इसके लिए पूरी व्यवस्था है। साइकिल ट्रैक से लेकर सार्वजनिक साइकिलें चलाई जा रहीं हैं। -धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासन
 
खुद चलाएं, दूसरों को भी प्रेरित करें
पर्यावरण संरक्षण के लिए हम सभी की भागीदारी होनी चाहिए। जरूरी होने पर ही कार का प्रयोग करें। साइकिल को चलन में लाएं। साइकिल खुद भी चलाएं और दूसरों को भी प्रेरित करें। इससे पर्यावरण के साथ-साथ खुद की भी सेहत सुधरेगी। -प्रो. राजकुमार, वीसी, पीयू
 
हफ्ते में एक बार साइकिल जरूर चलाएं
डीजल व पेट्रोल वाहनों के इस्तेमाल से निकलने वाला हानिकारक धुआं हमारी सेहत को बिगाड़ने केसाथ पर्यावरण को भी प्रदूषित कर रहा है। हमें प्रतिदिन संभव न हो तो हफ्ते में एक या दो दिन साइकिल की सवारी करने का प्रयास करना ही चाहिए। -प्रो. जगतराम, निदेशक, पीजीआई
 
हम पर ही पर्यावरण को बचाने की जिम्मेदारी
साइकिल का इस्तेमाल न केवल हमारे बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। पब्लिक बाइक शेयरिंग योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि लोग गाड़ी छोड़कर साइकिल का इस्तेमाल करें। सिटी ब्यूटीफुल के हर व्यक्ति को यह जिम्मेदारी लेनी होगी। -आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम
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