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बदल जाएगा अपराध जांच का तरीका, खून का धब्बा कितना पुराना..अब तुरंत लगेगा पता

Sat, 19 Sep 2020 02:36 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • पीयू के फोरेंसिक साइंस के डॉ. विशाल शर्मा को शोध के जरिये मिली सफलता, खून स्कैन करते ही आएगी रिपोर्ट
  • आईआर स्पेक्ट्रसकॉपी एंड कीमोमीट्रिक फार्मूला तैयार किया, शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल में मिली जगह
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डॉ. विशाल शर्मा - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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पंजाब विश्वविद्यालय के फॉरेंसिक साइंस विभाग के डॉ. विशाल शर्मा को शोध के जरिये बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने एक फार्मूला तैयार किया है। इसके जरिये यह पता लग जाएगा कि अपराध के दौरान गिरा खून का धब्बा कितना पुराना है। यानी उसकी उम्र पता लग जाएगी, वह भी मिनटों में। इस शोध को इंग्लैंड के जर्नल साइंस एंड जस्टिस में जगह मिली है। यह शोध अपराध की जांच करने वाले विशेषज्ञों के लिए बड़ी वरदान साबित होगी।

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डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि खून के धब्बों की जांच पहले कैमिकल के जरिये होती थी लेकिन यह फार्मूला पुराना था। कई बार अपराध सीन में एक ही खून का धब्बा मिलता है तो केमिकल से उसकी जांच की जाती है तो वह खून एक ही बार जांच के काम आ पाता है।

डीएनए आदि जांच के लिए खून चाहिए तो वह नहीं मिलता लेकिन इस फार्मूले से जांच में खून का धब्बा वैसे ही रहेगा, जैसे दिख रहा है। क्योंकि इस फार्मूले में खून के धब्बे को केवल स्कैन किया जाएगा और रिपोर्ट सामने आ जाएगी। इस शोध में सबसे कम त्रुटि मिली है। दुनियाभर में फार्मूले इस जांच के लिए बने भी हैं तो उनमें त्रुटियां काफी संख्या में हैं।
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खून जानवर का है या इंसान का तुरंत पता लगेगा
डॉ. विशाल शर्मा ने इस शोध के लिए आईआर स्पेक्ट्रसकॉपी एंड कीमोमिट्रीक फार्मूला तैयार किया है। यह रेडिएशन से जुड़ा हुआ है। जैसे ही खून के धब्बे को स्कैन किया जाएगा तो मिनटों में ही यह बताएगा कि यह खून इंसान का है या फिर जानवर का। इसके अलावा स्कैन के जरिये ही यह भी पता लग जाएगा कि खून कितना पुराना है और कब गिरा है। 

यह शोध डेढ़ साल तक चली। रिसर्च टीम ने 175 दिन तक खून के धब्बे की उम्र निकाली। रिसर्च में महज दो फीसदी ही त्रुटि मिली। बाकी 98 फीसदी रिपोर्ट बेहतर मिली। इस रिसर्च टीम में फोरेंसिक साइंस विभाग की एमएससी की छात्रा काजल शर्मा व शोधार्थी राजकुमार भी शामिल रहे।

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